मंगलवार, 29 जुलाई 2008

जन्मदायिनी माँ की आंख में आंसू क्यूँ


कन्या: जगत की
जीवनदायिनी शक्ति क्यूँ ?
शापित जनम से,
जन्म लेने के
अधिकार से वंचित क्यूँ ?
प्रकृति का कोमल उपहार
भोर की उजली किरण
जीवन की प्रथम कलि
खिलने से पहले ही मुरझाने को
विवश क्यूँ ?
कन्या: माँ, बेटी, बहन है
जन्मदायिनी माँ की आंख में
आंसू क्यूँ ।



Neelima Garg,
B-Block Nehru Colony ,
Dehradun,UTTARAKHAND

E-mail: neel_garg22@rediffmail.com



पटना से श्री सुरज कुमार वर्मा का एक पत्र डाक द्वारा आज ही प्राप्त हुआ। आपने अपने विचार भ्रूण ह्त्या पर लिखें हैं। इनका मानना है कि भ्रूण में पल रहा बच्चा मीरा, सहजो या लक्ष्मी बाई भी हो सकती है। कल्पना चावला या किरण वेदी भी बन सकती है। ऎसा सोचकर उसे जन्म दे, धरती पर आने दें। आप आगे लिखते हैं कि किसी अनैतिक संबंध के चलते हुऎ गर्भाधारन को समाज की मान्यता न होने से उसका गर्भपात विवशता हो सकती है, परन्तु यह भी अध्यात्म की दृष्टी से पाप ही माना जायेगा। समाज में यह गलत घर कर गया है कि बेटी होने से खर्च बढ़ जायेगा। जबकि बेटा बुढ़ापे का सहारा बनकर सहयोग देगा, शरीर समाप्त हो जाने के बाद मुखाग्नी देगा। यह हमारी सामाजिक परम्परा की सबसे बड़ी कमजोरी है। समाज के सभी वर्ग को मिलकर इस वातावरण में परिवर्तन लाना होगा। - सुरज कुमार वर्मा, गोसोई टोला, पटलिपुत्र , पटना -13

3 विचार मंच:

हिन्दी लिखने के लिये नीचे दिये बॉक्स का प्रयोग करें - ई-हिन्दी साहित्य सभा

बाल किशन ने कहा…

आपसे सहमत हूँ.
एक सार्थक पहल की है आपने.

महेंद्र मिश्रा ने कहा…

apke vicharo se sahamat hun or sabhi ko is masale par vichaar karana chahiye. bahut badhiya vichaar or sarahaniy pahal.

Popular India ने कहा…

सूरज जी के विचारों से मैं सहमत हूँ। समाज को अपनी सोच बदलनी होगी। और इसके लिए हम सभी को आगे आना होगा।

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