गुरुवार, 24 जुलाई 2008

तो फिर इस भ्रूण की हत्याऎ क्यों? - राजिया मिर्जा

भ्रूण हत्या विषय पर महेश जी के लेख से संपूर्ण सहमत हुं। हम लोग जब लक्ष्मीजी, पार्वतीजी, कालिकाजी अम्बाजी जैसी देवीओं को 'मां' के रूप में पूजते है। तो फिर इस भ्रूण की हत्याऎ क्यों? - राजिया मिर्जा

कटक से श्री रमेश जी ने एक नई कविता भेजी है:
अजन्मी बच्ची की व्यथा -
क्यों मां क्यों बाबा
क्यों तुमने मुझे मिटा दिया
अपनी ममता अपने जीवन से
क्यों तुमने मुझे जुदा किया
मैं इक लडकी हूँ
ये तो मेरा अपराध न था
जिसने दिया मुझे ये रूप
क्यों उस ईश्वर को तुमने क्षमा किया
क्यों लड़के की चाहत में
तुमने इस निरिह के प्राण हरे
क्यों भ्रूण से
अस्पताल के कूडेदान भरे
क्यों ना कांपे हाथ डाक्टर के
जिसने मुझे बलिदान किया
क्यों चंद सिक्कों की खातिर
पेशा उसने अपना निलाम किया
क्यों किसी का ह्रदय ना रोया
दादा-दादी का प्यार क्यों सोया
उनकी इक चाहत की खातिर
क्यों मैने अपना सब कुछ खोया
मैं इक लडकी ये मेरी गलती न थी
गलती मेरे मां बाप की
उस ईश्वर की
जिसने मुझे यूं जन्म दिया
मैं पूछूं संगी से अपने
क्यों फ़िर मेरा ही खून हुआ
क्यों ना ईश्वर का सिंहासन डोला
ना धरती का सीना फटा
क्यों गंगा भी मौन रही
क्यों पर्वत हिमालय रहा खड़ा
क्यों थी सबकी मौन स्वीकृति
मृत्यु का चोला क्यों मुझ पर दिया चढ़ा

Ramesh Agarwal
Advocate Orissa High Court
President Marwari Yuva Manch Cuttack Vikash
Sree Ram Kutir, hazari Lane, Telenga Bazar,
Cuttack - 753009
Cell : 9437035453
Ramesh Agarwal

3 विचार मंच:

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Udan Tashtari ने कहा…

मार्मिक अभिव्यक्ति!! आभार इस प्रस्तुति के लिए रजिया मिर्जा जी की.

Smart Indian ने कहा…

कविता दिल को छू गयी. बधाई!

anilpandey ने कहा…

wastaw men kawita bahut hi achchhi lgi dhanyawad !

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