देश को दो बार संप्रदायिकता की आग में झौंकने वाले भाजपा के कदवार नेता श्री लालकृष्ण आडवाणी जी ने आखिरकार मानमनुवल के पश्चात अपना इस्तीफा वापस ले ही लिया। इस इस्तीफा वापसी के पीछे भी इस अति महत्वकांक्षी व्यक्ति की सौदावाजी को नकारा नहीं किया जा सकता। जिस प्रकार इन्होंने श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को बाध्य किया था कि वे लिखकर देंवे कि देश का अगला ‘‘पी.एम इन वेटिंग’’ आडवाणी जी ही होंगे। कई सालों तक वे अपने नाम के साथ इस तगमे को लगाये जनता के सामने फिरते रहे कि ‘‘अगला प्रधानमंत्री मैं ही हूँ’’। जब देश की जनता ने इनके इस कद को दो बार सिरे से नकार दिया और पूरी की पूरी गठबंधन दल मिलकर भी माननीय आडवाणी जी को प्रधानमंत्री के पद तक नहीं पंहुचा पाई। आज इस भाजपा के लिबरल चेहरे को लगता है कि उनका ‘‘पी.एम इन वेटिंग’’ का सपना अधुरा ही रह जाएगा। इस बीच जब भाजपा में नये चेहरे उभरकर खुद-व-खुद सामने आयें हैं तो आडवाणी जी को लग रहा कि उनके पी.एम. पद को कोई दूसरा व्यक्ति जो उनके कद से छोटा है हड़पने जा रहा है। जिसके लिये उन्होंने जिन्ना की मजार पर भी मन्नतें मांगी थी और उनको धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति के सम्मान से नबाजा था। मानो एक सांप्रदायिक व्यक्ति दूसरे सांप्रदायिक व्यक्ति को प्रमाण पत्र दे रहा हो। वर्तमान में हुए इस्तीफा नाटक ‘‘खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे’’ मुहावरा को सत्य साबित कर देने में सक्षम हो गया। इस इस्तीफा प्रकरण से आडवाणी के कई इरादे को स्पष्ट रूप से पढ़ा जा सकता है जैसा कि इन्होंने अपने पत्र में भाजपा पर यह आरोप लगाया कि ‘‘पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। इसमें व्यक्ति विशेष का महत्व बढ़ता जा रहा है। लगता नहीं कि यह श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी के आदर्शों पर चलने वाली पार्टी है।’’ इनका स्पष्ट संकेत है कि भाजपा में इनके कद को कोई भी व्यक्ति छोटा करने का प्रयास किया तो वे पार्टी लाईन से हटकर एक नई पार्टी तक बनाने की बात भी सोच सकते थे। श्री राजनाथ सिंह जी खैर मनायें कि उनका ( आडवाणी जी का ) तीसरा धमाका बीच में ही रूक गया अन्यथा भाजपा नेताओं को सत्ता के सपने देखने का अवसर भी नहीं देते अडवाणी जी। इस त्यागपत्र प्रकरण से किसे लाभ होगा किसे नहीं यह तो आने वाला 2014 का लोकसभा चुनाव ही बता पायेगा कि जनता ने इस प्रकरण को किस प्रकार लिया है। हाँ! एक बात जरूर है कि इससे श्री आडवाणी जी का कद बहुत छोटा हो गया। आज देशभर से आवज उठ रही है कि ‘‘नरेन्द्र मोदी को आगे लाया जाए - कांग्रेस को हटाया जाए’’ एनडीए के कुछ दलों का यह अहंकार कि यदि मोदीजी को भाजपा ने प्रजोक्ट किया तो वे दल को छोड़ देगें । वे होते कौन हैं मोदीजी को हटाने वाले? यदि देश की जनता मोदीजी को लाना चाहती है तो मोदी जी को कोई नहीं रोक सकता। गठबंधन जनता की आवाज के साथ रहना चाहे तो रहे। जाना चाहते हों तो कल क्यों आज ही छोड़कर जा सकतें हैं। धर्मनिरपेक्षता की कतार में खड़े होकर अपना दामन भी साफ कर लेवें। यही मौका है उनको धर्मनिपेक्षता का प्रमाणपत्र प्राप्त करने का। मुसलमानों के वोटों को बटोरने का।
मंगलवार, 11 जून 2013
आडवाणी जी का इस्तीफा नाटक
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 8:36 pm 1 विचार मंच
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शनिवार, 2 जुलाई 2011
धन्य हो गया बिहार - शम्भु चौधरी
आज इस बात को लिखने में मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है कि हमें नीतीश कुमार भी इन्ही भ्रष्टाचारियों के बीच से ही मिला है जिसने गर्त में डूबे बिहार का न सिर्फ चन्द सालों में काया ही बदल डाली। अल्पसंख्यकों की रहनुमाई कर बार-बार सत्ता पर काबिज होने वाले सत्ता के दलालों के दरवाजों पर अलीगढ़ी ताले भी लटका डाले। चारों तरफ कुशासन, अपहरण हत्या पर न सिर्फ इन्होंने लगाम लगा दी, राज्य में पूंजी निवेश के भी कई नये विकल्प खोल दिये। मानो बिहार श्री नीतीश जी के शासन व्यवस्था से धन्य हो गया हो।
कल जब श्री अन्ना हजारे एवं उनके सहयोगी सदस्य बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार से मिले तो एक तरफ नीतीश जी ने लोकपाल बिल को प्रभावी तथा व्यापक बनाने की वकालत की तो दूसरी तरफ बिहार में जल्द ही इस तरह का कानून लाने का आश्वासन भी दे डाला। आज इस बात को लिखने में मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है कि हमें नीतीश कुमार भी इन्ही भ्रष्टाचारियों के बीच से ही मिला है जिसने गर्त में डूबे बिहार का न सिर्फ चन्द सालों में काया ही बदल डाली। अल्पसंख्यकों की रहनुमाई कर बार-बार सत्ता पर काबिज होने वाले सत्ता के दलालों के दरवाजों पर अलीगढ़ी ताले भी लटका डाले। चारों तरफ कुशासन, अपहरण हत्या पर न सिर्फ इन्होंने लगाम लगा दी, राज्य में पूंजी निवेश के भी कई नये विकल्प खोल दिये। मानो बिहार श्री नीतीश जी के शासन व्यवस्था से धन्य हो गया हो। अब जब देश में जन लोकपाल बिल पर एक लम्बी लड़ाई लड़ी जा रही है। केन्द्र में भ्रष्टों की सरकार इसे लोकतंत्र पर प्रहार मानती है और कुत्ते की तरह भौंकना आरम्भ कर दिया है कोई इसे संसद पर हमला बता रहा है तो कोई इसे लोकतंत्र पर, कोई समानान्तर सरकार की संज्ञा दे रहा है तो काई सांप्रदायिक ताकतों की साजिश मान लोकतांत्रिक तरीके से चुन कर आयी हुई बहुमत की सरकार को गिराने की षडयंत्र मानती है। सरकार के कुछ भ्रष्टाचार संरक्षक अभियान के मंत्री ऐन-केन प्रकारेण बिल की मूल को ही बिल से निकाल कर देश को गुमराह करने की योजना पर कार्य कर रहें हैं। इन सबके बीच बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने एक अच्छी पहल कर पुनः यह प्रमाणित कर दिया कि देश में अभी भी अच्छे लोगों की कमी नहीं है। भ्रष्टाचार का मुद्दा भले ही कांग्रेसियों के गले न उतरे पर बिहार की इस सकारात्मक पहल से देश के अन्य राज्यों को भी काफी बल मिलेगा।
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 12:10 pm 0 विचार मंच
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