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शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2021

जयश्रीराम’ के नाम से देश में गुण्डागर्दी ?

 जो संबोधन युगों से हिन्दुओं का अभिवादन देने व स्वीकार करने का माध्यम था आज पूरी तरह से राजनीति रूप ले चुका है। जिसका परिणाम हमें पिछले दिनों कोलकाता के एक सामाजिक कार्यक्रम में  प्रधानमंत्री की उपस्थिति में ही देखने को मिल गया।  इसके बाद जिस तरह के चित्र सोशल मीडिया में पोस्ट किये गए और अपमानजनक भाषाओं को  प्रयोग  किया गया । यह सब इस बात का सूचक है कि अब देश में ठीक वही कट्टरपनतता जन्म ले चुकी है जो अब तक पाकिस्तानी मुसलमानों का हिस्सा हुआ करती थी।

सदियों से भारतीय संनातनी धर्म के अनुयाई आपस में संबोधन में, भाई-चारे का इजहार करने में या आपस में मिलने पर एक-दूसरों को ‘‘जय श्रीराम’’ बोलकर  अभिवादन किया करते थे।  परन्तु आजकल जब से मोदी सरकार सत्तारूढ़ हुई है भाजपा ने इस नारे को राजनीतिक हथकण्डे के रूप में अपना लिया है। संघवादी संगठन  इस नारे का  प्रयोग  हिन्दू कट्टरवाद के प्रदर्शन के रूप में जमकर किया जाने लगा है। गौरक्षा के नाम से गुण्डागर्दी, मोब लंचिंग  से लेकर दिल्ली के दंगों के समय हो या किसान आंदोलन इस  उदघोष का प्रयोग खुल कर राजनीति रूप से होने लगा है। 

कभी भारत माता की जय ना बालेने पर मारना पिटना तो कभी ‘जय श्री राम’ बोल कर लोगों को भयभीत करना इनका एक मात्र लक्ष्य बन चुका है। राजनैतिक प्रायोजित व सत्ताधारी दल के समर्थन से जगह-जगह धमाकने, राजनीतिक विचारधारा के विरोधियों को, उनकी माँ-बहनों को अपशब्दों से संबोधित करना, ना जाने कितने अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना इनका एक मात्र उद्देश्य बन चुका है। 

This picture from Bhopal (M.P) Dated 14.02.2021 Rulling 10-15 BJP Worker chanting "Jaishree Ram" and doing gundagardi like this..


जो संबोधन युगों से हिन्दुओं का अभिवादन देने व स्वीकार करने का माध्यम था आज पूरी तरह से राजनीति रूप ले चुका है। जिसका परिणाम हमें पिछले दिनों कोलकाता के एक सामाजिक कार्यक्रम में  प्रधानमंत्री की उपस्थिति में ही देखने को मिल गया।  इसके बाद जिस तरह के चित्र सोशल मीडिया में पोस्ट किये गए और अपमानजनक भाषाओं को प्रयोग किया गया । यह सब इस बात का सूचक है कि अब देश में ठीक वही कट्टरपनतता जन्म ले चुकी है जो अब तक पाकिस्तानी मुसलमानों का हिस्सा हुआ करती थी।

इन तथाकथित ‘जयश्रीराम’ के नाम से देश में गुण्डागर्दी करने का जैसे इनको सरकारी लाइसेंस मिल चुका हो, पर भारत का संविधान इस  बात की इजाजत  इनको कदापी नहीं देता कि वे धर्म की आढ़ में राजनीति करें। सभी धर्मावलम्बियों को अपने-अपने धर्म को मानने की स्वतंत्रता है। उन पर किसी अन्य विचारधारा को थोपना या उनको परेशान करना किसी भी रूप में संवैधानिक नहीं माना जा सकता है। 

यह इस बात को प्रमाणित करता है कि आज की भाजपा देश के किसी भी धर्मावलंबियों की पार्टी नहीं है। जिसे अभी किसान आंदोलन के समय हमें देखने मिला जब पंजाबियों को उनके देश के प्रति सेवा को एक सिरे से नकार दिया गया।   मानो भाजपा अब राष्ट्रीय विचारधारा की आढ़ में एक उग्रवादी विचारधारा की पोषक बन चुकी है जो हर बात में अपने विरोधी विचारधारा को मामने वालों पर धार्मिक हमला करने से भी नहीं चुकती, भले ही वह आंदोलन या राजनीतिक दल किसी भी धर्म के लोगों का क्यों न जुड़ा हो ।

यह खेल कितना खतरनाक  है जो हमें बंग्लादेश की उत्पति की याद दिलती है । पाकिस्तान एक धर्म के  होते हुए भी दो हिस्सों में बंट गया, यह जो खेल भाजपा खेल रही है उसका आने वाले दिनों में कितने गंभीर परिणाम होगें यह मेरे सोच के परे है। 

राजनीति में सत्ता का आना-जाना लगा रहता है। भारतीय लोकतंत्र की यही खुबसूरती है कि  कई बार असमाजिक तत्व भी चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंच जाते हैं।  अपराधिक रिकोर्ड वाले तो लोकसभा या विभिन्न राज्यों के विधान सभाओं  में भरे पड़ें हैं। कोई भी राजनीति दल इन अपराधिक तत्वों से अछुता नहीं है। 

अदालतों की कई बार कड़ी टिप्पणियाँ इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र में ऐसे तत्वों को कोई जगह नहीं है,  फिर भी राजनीति दलों की मजबूरी है कि वे इनके बिना चुनाव लड़ने में खुद को असमर्थ पाते हैं।   परन्तु पिछले दो कार्यकाल में  सोलहवीं व सत्रहवीं लोकसभा इन तत्वों के साथ-साथ हिन्दूधर्म के अनुयायियों के कट्टरपनतता का अदभूत मिश्रण देखने को मिलता है। 

भारत में विभिन्न धर्म के लोग बड़ी संख्या में बास करते हैं। जिसमें मुसलमानों के अलाव भी पंजाबी, जैन, बुद्ध व हिन्दुओं में कई  प्रजातियां जो कोई ‘राम’ को मानती है तो किसी के लिये कृष्ण लोकप्रिय ।  असम से लेकर दक्षिण भारत तक इसके स्वरूप  में तेजी से बदलाव देखा जा सकता है। जो लोग आज ‘जय श्रीराम’ को राजनीतिक रूप में इस्तमाल करने में लगे हैं उनको यह तो पता ही होगा  कि भारत में सिर्फ ‘राम’ के अनुयायी नहीं हैं। मुसलमानों को छोड़ कर भी बहुत सारे अन्य धर्म के मानने वाले लोगों की बहुतायत भी है इस देश में । _shambhu Choudhary