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गुरुवार, 30 जून 2016

दिल्ली में दिल्ली पुलिस का जंगल राज

लेखक: शम्भु चौधरी

दिल्ली पुलिस की वेवसाइट पर अपराध के जो आंकड़े दिये गये उसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि भाजपा के राज में दिल्ली पुलिस का जंगलराज किस चरम सीमा तक पंहुच गया है। 2015 में डकैती कि 75 घटना हुई और 2016 में अब तक 21 घटना पुलिस थाने में दर्ज हो चुकी है। इसी प्रकार हत्या के मामले में 570 और जनवरी 2016 से अब तक 219, रोबरी में 2199 व 2016 में 2556, रेप 2199/ 2016 में अब तक 999, चोरी 56385/ 2016 में अब तक 6247, इसी प्रकार छिनताई 9896/ 2016 में अब तक 4625 कुल अन्य सभी प्रकार के अपराधों की संख्या सुन कर आप सदमें में आ जाएंगे वह आंकड़ा 191377 व 2016 में अब तक 2016 में अब तक 90818 यह सभी आंकंड़े दिल्ली पुलिस की वेवसाइट पर उपलब्ध है।

जब से दिल्ली में भाजपा की केन्द्र में सरकार हुई है दिल्ली पुलिस का अब एक ही काम रह गया है कि केजरीवाल को ऐन-केन प्रकारेण परेशान किया जाए, उनके साथियों पर झूठे मुकद्दमे लगाये जाये और तो और दिल्ली पुलिस को इतनी आजादी दे दी गई कि वह कानून व्यवस्था के नाम पर सरेआम गुंडागर्दी भी करे तो कोई उसे रोकने-टोकने वाला भी नहीं।
भारत के गृहमंत्रालय के अंर्तगर्त दिल्ली पुलिस का सीधा खूनी खेल चल रहा है। दिल्ली कि आम जनता लाचार और निःसहाय होती जा रही है। दिल्ली में दिल्ली पुलिस पर सीधा नियंत्रण भारत सरकार का है। जिसके मुखिया गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह जी है। परन्तु पता नहीं बिहार में जंगलराज का हल्ला करनेवाले भाजपा के साथीगण के नाक के नीचे सरेआम रेप, हत्या , लूटपाट, दिनताई, डकैती चोरी की घटना आम बन गई है। भापजा के किसी भी नेता को दिखाई नहीं दे रहीं।
पिछले दिनों दिल्ली में दिल को दहला देने वाली कई वारदात सामने आई। तमाम समाचार पत्रों में दिल को दहला देने वाली कई वारदातें छाई रही पर ना जाने इन गृहमंत्रालय को क्या सुंघ गया कि दिल्ली पुलिस पर कोई कार्यवाही न करने के, उल्टे उसे दिल्ली की जनता को लूटने का लाइसेंस प्रदान कर दिया। मजे की बात यह कि दिल्ली की एंटी क्रप्सन ब्योरो को भी पंगु बना दिया गया ताकी कोई कार्यवाही उसकी मदद से भी ना की जा सके। दिल्ली में मानो दिल्ली पुलिस को सिर्फ एक ही काम दे दिया गया है कि पुरी दिल्ली पुलिस केवल केजरीवाल व 'आप’ की सरकार के विधायकों के के पीछे लगी रहे। जनता मरे तो मरे। कानून व्यवस्था के नाम पर पूरी दिल्ली में एक प्रकार से जंगलराज कायम हो चुका है। दिल्ली के उपराज्पाल नजीब जंग साहेब , केन्द्र सरकार का गृहुमंत्रालय सब के सब दिल्ली पुलिल की काली करतुतों को चुपचाप मौन सहमती दिये हुए है कि भले ही दिल्ली की महिलाओं के साथ रेप हो, हत्या हो, डकैती हो, केन्द्र की भाजपा सरकार चुप रहेगी।
दिल्ली पुलिस की वेवसाइट पर अपराध के जो आंकड़े दिये गये उसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि भाजपा के राज में दिल्ली पुलिस का जंगलराज किस चरम सीमा तक पंहुच गया है। 2015 में डकैती कि 75 घटना हुई और 2016 में अब तक 21 घटना पुलिस थाने में दर्ज हो चुकी है। इसी प्रकार हत्या के मामले में 570 और जनवरी 2016 से अब तक 219, रोबरी में 2199 व 2016 में 2556, रेप 2199/ 2016 में अब तक 999, चोरी 56385/ 2016 में अब तक 6247, इसी प्रकार छिनताई 9896/ 2016 में अब तक 4625 कुल अन्य सभी प्रकार के अपराधों की संख्या सुन कर आप सदमें में आ जाएंगे वह आंकड़ा 191377 व 2016 में अब तक 2016 में अब तक 90818 यह सभी आंकंड़े दिल्ली पुलिस की वेवसाइट पर उपलब्ध है।

शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

अरविंद का जनता दरबार - शम्भु चौधरी


अरविंद केजरीवाल ने सचिवालय की छत से जनता को संबोधित कर जनता को धेर्य रखने को कहा कि ‘‘जल्द ही व्यवस्थित रूप से पुनः जनता दरबार लगाया जाएगा। अरविंद ने अपने बयान में कहा कि इतनी भीड़ की उनको उम्मीद नहीं थी। इसके लिय नये सिरे से पूरी व्यवस्था करनी होगी। जिससे लोगों की समस्याओं का जल्द से जल्द निदान हो सके।’’ 

 दिल्लीः दिनांक 11 जनवरी’2014 - सरकार हो तो ऐसी जो जनता के दर्द को अपना दर्द बना लें। दिल्ली में सचिवालय के बाहर ‘आम आदमी पार्टी की सरकार’’ के द्वारा जनता दरबार में जनता की समस्या इतनी देखने को मिली की शायद कभी किसी ने उनकी सुध तक ना ली हो। जैसे ही आज से सुबह 9.30 बजे से जनता दरबार लगाने की घोषणा हुई जनता को लगा कि कोई उनकी बात सुनेगा, जनता अपने आवेदन और समस्याओं के साथ उमड़ पड़ी। 
आज की बैकाबू भीड़ को देखकर अरविंद केजरीवाल को आज की जनता दरबार को बीच में ही रोक देना पड़ा।

अरविंद केजरीवाल ने सचिवालय की छत से जनता को संबोधित कर जनता को धेर्य रखने को कहा कि ‘‘जल्द ही व्यवस्थित रूप से पुनः जनता दरबार लगाया जाएगा। अरविंद ने अपने बयान में कहा कि इतनी भीड़ की उनको उम्मीद नहीं थी। इसके लिय नये सिरे से पूरी व्यवस्था करनी होगी। जिससे लोगों की समस्याओं का जल्द से जल्द निदान हो सके।’’ 

इस जनता दरबार में सबसे बड़ी समस्या जो देखने को मिली वह लोग समूह के रूप में ज्यादा आ रहे थे। ठेकेदारी में काम कर रहे मजदूरों की सबसे बड़ी समस्या थी जो लोग बड़े-बड़े ग्रुप बनाकर जनता दरबार में आ गये । जिससे पूरी-पूरी व्यवस्था धीरे-धीरे चरमरा गई।

कहावत है ‘‘एक अनार-सौ बीमार’’  अरविंद केजरीवाल और इनके मंत्री ज्यों-ज्यों जनता के दर्द को सहलाते गए यह दर्द जख्म का रूप धारण करता गया। मानो दिल्ली की जनता में पिछले 30 सालों से इस दर्द को सहने की आदत सी बन गई थी। असफलता सफलता की कुंजी होती है। आज अरविंद केजरीवाल ने फिर प्रमाणित कर दिया की वे आज भी जनता के साथ हैं। भले ही आज इस दरबार से जनता की समस्या ना सुनी जा सकी हो पर यह तो साफ हो गया कि समस्या की जड़ें बहुत पुरानी है जिसे जड़ से ही समाप्त करना होगा। 

शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

दिल्ली भाजपाः सदी की चूक - शम्भु चौधरी


जहां तक मेरी राजनीति समझ है भाजपा के नेताओं ने दिल्ली में सरकार का दावा ना प्रस्तुत कर ‘आप’ पार्टी को राजनीति जमीन प्रदान कर दी है। आज देशभर में ‘आम आदमी पार्टी’ की धूम मची हुई है। जो लोग भाजपा में आना चाहते थे वे सभी झूंड के झूंड  ‘आप’ को ज्वाईन करने लगे। ‘आप’ द्वारा सरकार बनाने की घोषणा के महज चार दिनों में ‘आप’ को देशभर में जो समर्थन प्राप्त हुआ और दिल्ली में जिस प्रकार शपथ समारोह का दृश्य देशभर ने देखा इससे भाजपा की जमीन नीचे से हिल गई है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में डॉ. हर्षवर्धन जी  के नेतृत्व में भाजपा ने चुनाव लड़ा। नीतिन गडकरी जी इस विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी बनाये गए। चुनाव का वक्त ज्यों-ज्यों नजदीक आता गया विजय गोयल से चुनाव की कमान छीनकर भाजपा के सबसे शातिर नेता श्रीमान् नितिन गडकरी ने गोयल से यह कमान छीन ली और साफ-सुथरी छवि की आड़ में दिल्ली भाजपा की कमान खुद के खेमे के चापलूस नेता डॉ. हर्षवर्धन जी के हाथों थमा दी। दिल्ली भाजपा यह कवायद वह भी चुनाव के ऐन वक्त पर, जीत का बहाना था कि मोदी के विजय रथ को रोकने का? यह तो वक्त ही बतायेगा। हाँ! अब यह बात साफ हो चुकी कि दिल्ली भाजपा के डॉ. हर्षवर्धन जी ने जिस प्रकार दावा प्रस्तुत किया कि उनकी पार्टी विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी होकर भी विपक्ष में बैठी है इसका अर्थ निकालना तो पड़ेगा ही।

दरअसल भाजपा के पक्ष में 32 सीटों के परिणाम जैसे ही घोषित हुए,   डॉ. हर्षवर्धन जी ने बैगेर राजनीति विचार विमर्श किये ही बयान जारी कर अपने हाथ खड़े कर दिये बस यही पल भाजपा के लिए आत्मधाती निर्णय साबित हो गया। यह बात तो डॉ. हर्षवर्धन जी विधानसभा के भीतर भाजपा के पक्ष में विश्वास मत प्राप्त करने के वक्त भी कह सकते थे। सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग ना कर राजनीति मैदान से भाग से भाग खड़े होने वाले डॉ. हर्षवर्धन जी को यह तो जबाब देना ही होगा कि आज देश भर में मोदी की लहर में ‘आप’ पार्टी को मजबूत आधार प्रदान कर देने के लिए सबसे प्रमुख दोषी कौन है?

जहां तक मेरी राजनीति समझ है भाजपा के नेताओं ने दिल्ली में सरकार का दावा ना प्रस्तुत कर ‘आप’ पार्टी को राजनीति जमीन प्रदान कर दी है। आज देशभर में ‘आम आदमी पार्टी’ की धूम मची हुई है। जो लोग भाजपा में आना चाहते थे वे सभी झूंड के झूंड  ‘आप’ को ज्वाईन करने लगे। ‘आप’ द्वारा सरकार बनाने की घोषणा के महज चार दिनों में ‘आप’ को देशभर में जो समर्थन प्राप्त हुआ और दिल्ली में जिस प्रकार शपथ समारोह का दृश्य देशभर ने देखा इससे भाजपा की जमीन नीचे से हिल गई है। 

इस सबके लिए मैं विशेष रूप से भाजपा को ही जिम्मेदार मानता हूँ। जितना आसान राह था मोदी का दिल्ली सफर, दिल्ली भाजपा ने उसके मार्ग में देशभर में कांटे उगा दिये। दिल्ली भाजपा के प्रभारी श्रीमान नितिन गडकरी ने राजनाथ सिंह से जो राजनैतिक बदला लिया इसके भनक भी शायद किसी को नहीं मिली होगी।  दिल्ली के इस राजनैतिक चाल मे सह किसने किसको दिया यह तो वक्त ही बतायेगा पर मात तो साफ नजर आ रही है। 

दिल्ली विधानसभा में विश्वासमत के दौरान डॉ. हर्षवर्धन जी भले ही नैतिकता की बात करते रहे हों, केजरीलवाल और मनीष सिसोदिया पर व्यक्तिगत अरोपों की झड़ी लगा दी। दिल्ली विधानसभा में कश्मीर का राग अलापते रहे हों पर दिल्ली की जनता के हित में बात कहने से बचते रहे। 30 सालों से दिल्ली की जनता को धोखा देने वाले राजनैतिक दल इससे ज्यादा बोल भी क्या सकते थे? 

खैर! भले ही भाजपा के समर्थक डॉ. हर्षवर्धन के भाषण से खुश हो लें, साथ ही यह भी ना भूलें कि इसी  (डॉ. हर्षवर्धन) व्यक्ति ने ‘आप’ को पूरे देश में रातों-रात फैला दिया है। दिल्ली चुनाव परिणामों के परिपेक्ष में देखा जाए तो जहाँ कांग्रेस ने ‘आप’ को समर्थन देकर दिल्ली में अपनी स्थिति को पहले से बेहतर बना ली है वहीं भाजपा ने सरकार का रास्ता ‘आप’ के लिए छोड़कर मोदी के साथ घोखा किया है। 

जो काम कांग्रेस ने किया यही काम भाजपा भी कर सकती थी। पहली बात तो भाजपा को सरकार बनाने का दावा स्वयं प्रस्तुत करना चाहिये था। सदन के भीतर दोनों (आप एवं कांग्रेस) पार्टियों की स्थिति स्वतः साफ हो जाती। यह नहीं हुआ तो ‘आप’ को समर्थन देकर कांग्रेस को पूरे देश में घेरा जाना था। भाजपा दोनों जगह विफल रही और आज खुद पूरे देश में ‘आप’ की शिकार बन गई। 

गुरुवार, 2 जनवरी 2014

गडकरी की चाल सफल

जनता पर एहसान लाद रही थी कांग्रेस

देश के इतिहास में शायद यह पहली घटना होगी जब किसी विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण हुआ हो। दिल्ली विधानसभा में अरविंद केजरीवाल की ‘आप’ की सरकार के बयान को देश की जनता सीधे देख रही थी। इससे पहले हम विधानसभाओं का प्रसारण जब सदन के भीतर चप्पल-जूते चलते थे तभी देखते थे।
विधानसभा में विश्वास मत पर कांग्रेस अपने 8 विधायकों को लेकर अहंकार में बोलती नजर आई मानो वह ‘आप’ को समर्थन नहीं दिल्ली की जनता के ऊपर बड़ा भारी एहसान कर रही हो। वहीं भाजपा इस बात का दंभ भरती रही कि दिल्ली की जनता ने उनको सर्वाधिक मतों से विजयी बनाया और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में होकर भी विपक्ष में बैठी है। मानो सब कोई जनता के वोट से चून कर आयें, और जनता पर ही अपने दल का एहसान लाद रहें हो। वहीं केजरीवाल ने साफ किया कि वे जनता के साथ कल भी थे और आज भी उसी तरह से जनता के साथ खड़े हैं। आप ने 37-32 से विश्वास मत जीता।

डा. हर्षवर्धन तो पहले से ही भगोड़े थे। 

हर्षवर्धन जी विधानसभा में केवल इस बात का दंभ भर रहे थे कि वे विपक्ष में बैठकर भाजपा दिल्ली की जनता पर ही एहसान कर रही है। ‘‘हमारी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी है जिसे जनता ने सबसे अधिक सीटें दी है। सबसे अधिक वोट मिले हमको। हम जनता के वोट से चुनकर आयें हैं इसलिए हम जनता को सदन के भीतर बैठकर जूते मारेगें।

गडकरी की चाल

दिल्ली में गडकरी की चाल सफल हुई दिल्ली में मोदी को हरा दिया गडकरी ने दिल्ली में सरकार ना बनाकर दिखा दिया की देश की पूरी जनता मोदी के साथ नहीं।

बुधवार, 1 जनवरी 2014

कलम आज इनकी जय बोल - शम्भु चौधरी

देश को संसद में, विधानसभा में लूटने वाले लोग, गठबंधन के नाम पर लोकतंत्र का चिरहरण करने वाले, लोकतंत्र को लूटतंत्र में तब्दील करने वाले लोग, चुनाव के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी करने वाले लोग, विकास के नाम पर भ्रष्टाचार करने वाले लोग, कॉर्पोरेट चंदे के सौदागर, असामाजिक तत्वों के बल पर सत्ता प्राप्त करने वाले लोग, जनतंत्र को बर्वाद कर देने पर आमदा सत्ता की जोड़-तोड़ में माहिर शातिर लोगों को अचानक से सबकुछ अराजकता लगने लगी। 
आम आदमी पार्टी दिल्ली की सत्ता को संभालते ही महज दो दिनों जनता से किया वादा पूरा कर दिखाया। अरविंद केजरीवाल में कार्य करने की अदभुत क्षमता को देख देष आश्चर्यचकित है अपनी बीमारी के बावजूद भी केजरीवाल ने आम जनता से किये दो प्रमुख वादों में- पानी और बिजली क दामों में कटौती कर दिखा दिया कि सरकार चाहे तो जनता की भलाई के लिए कार्य करना चाहे तो इसमें कोई अड़चन नहीं आ सकती। ‘आप’ के मंत्री मनीश सिसोदिया, राखी बिड़ला जहाँ रात को रैन बसेरा का निरक्षण कर रहे तो,  सोमनाथ भारती, सत्येन्द्र जैन, गिरीश सोनी और सौरभ भारद्वाज सभी अपने-अपने कार्य में लगे देखे गए। कई महत्वपूर्ण जनता के हित में फैसले लिए जा रहे हैं । 

जनता एक तरफ खुश नजर आ रही है तो दूसरी तरफ अन्य राजनीति दल एवं इनके द्वारा पोषित समाचार संपादकों, किसी के हाथ तो, किसी के पाँव भारी हो गए । इनको लगने लगा कि अब तक जिस दिल्ली को वे अपने आभा मंडल से हड़प लेना चाहते थे में सफलता नहीं मिल तो क्या हुआ हम अपनी पूरी ताकत झोंक देगें परन्तु केजरीवाल या ‘आप’ पार्टी को किसी भी हालात में मोदी के मार्ग में आने नहीं दिया जाएगा । 

अभी से ही इन लोगों ने आरोपों की झड़ी लगा दी । महज चार दिन में 40 आरोप जन्म हो गए।  ऐसा क्यों किया? वैसे करने से क्या होगा? "जनता का पैसा है।" ‘आप’ वाले जनता का पैसा लुटाने में लग गए? आदि-आदि देश का धन लूटने वाले के मुंह से जनता के प्रति संवेदना के शब्द 30 साल बाद सुनने को मिल रहें हैं 15 साल भाजपा दिल्ली की सत्ता में रहकर भी गरीबों तक पानी पंहुचाने के नाम पर पानी बेचने का धंधा शुरू कर दिया तब इनको जनता की याद आई कि जनता के धन सदुपयोग कर जनता की सेवा की जाय अब अचानक से महज चार दिनों में इनको जनता के धन की चिंता सताने लगी।

15 साल कांग्रेस वाले सत्ता में राज्य किये। शीला जी ने कई विकास के काम किये तब इनको पानी की बात क्यों नहीं आई। दिल्ली के कई कॉलोनियों में आजादी के 60 साल बाद भी पानी की पाइप लाइन तक नहीं डाल पाये, दावा इतना कि मानो देश की तकदीर ही बदल डाली हो। 

देश को संसद में, विधानसभा में लूटने वाले लोग, गठबंधन के नाम पर लोकतंत्र का चिरहरण करने वाले, लोकतंत्र को लूटतंत्र में तब्दील करने वाले लोग, चुनाव के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी करने वाले लोग, विकास के नाम पर भ्रष्टाचार करने वाले लोग, कॉर्पोरेट चंदे के सौदागर, असामाजिक तत्वों के बल पर सत्ता प्राप्त करने वाले लोग, जनतंत्र को बर्वाद कर देने पर आमदा सत्ता की जोड़-तोड़ में माहिर शातिर लोगों को अचानक से सबकुछ अराजकता लगने लगी। 

जनता से संवाद यदि अराजकता है तो जनता यही चाहती है। जनता की सत्ता में हिस्सेदारी यदि विद्रोह है तो हाँ! जनता इस विद्रोह के साथ है। जनता का धन लूटने से बचा के जनता के काम आता हो तो अरविंद के हर फैसले जनता को मंजूर है। आज देश करवटें ले रहा है। देश के अच्छे युवक देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। हमें हर हाल में इनका साथ देना चाहिये ।

 राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी ने अपनी कविता शायद इन्हीं दिनों के लिये लिखी थी - ‘‘कलम आज इनकी जय बोल’’ मुझे गर्व हो रहा है कि हम आज सपने के भारत को पूर्व से उगता देख रहें हैं । भले ही इन युवकों में प्रशानिक क्षमता-दक्षता कम हो पर देश सेवा का जज्बा जो है इनमें। हम संतुष्ट है। आशा करता हूँ इनका भविष्य उज्जवल हो। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ नववर्ष की मंगलकामना करता हूँ। जय हिन्द, जय भारत!!
02-01-2014
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शनिवार, 28 दिसंबर 2013

केजरीवाल का ऐतिहासिक भाषण -शम्भु चौधरी



अब यह सरकार सिर्फ 7 मंत्री नहीं चलायेगें, सरकार कुछ अफ़सर नहीं चलायेगें, सरकार कुछ पुलिसवाले नहीं चलायेंगें। हमें ऐसी व्यवस्था कायम करगें दिल्ली के अंदर हम डेढ़ करोड़ लोग मिलकर सरकार बनायेगें। डेढ़ करोड़ मिलकर सरकार चलायेगें। - अरविंद 

मेरी एक कविता है-
वोटों की ताकत को जानो, अपनी ताकत  को  पहचानो,
   घर-घर अलख जगा दो आज, भ्रष्टाचार मिटा दो आज। 




























अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के रामलीला मैदान के ऐतिहासिक मंच पर


श्री अरविंद केजरीवाल ने आज दिल्ली के रामलीला मैदान के ऐतिहासिक मंच पर अपने 6 विधायकों के साथ मुख्यमंत्री पद व गोपनीयता की शपथ लेकर देश के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। लोकतंत्र इस रामलीला मैदान से मानो हुंकार भर यह कह रहा हो- ‘‘मुझे मजाक से भी हल्का मत लेना’’

लाखों लोगों के जन सैलाब, लबालब भरा रामलीला मैदान को देशभर की जनता अपनी आंखों से देख रही थी । भारत के इतिहास में सैलाब वह भी एक साधारण सामाजिक जीवन से राजनीति में आने वाले एक आम आदमी के उस क्षण का है जो हमेशा से ही अपना नया रास्ता बनाता रहा है। मध्यम श्रेणी के परिवार में जन्मे श्री अरविंद केजरीवाल ने अपने चंद साथियों के साथ सफलता के उस शिखर पर कदम रखने के लिए अपना पहला कदम बढ़ा दिया हो।
दिल्ली विधानसभा के चुनाव में जिस ऐतिहासिक जीत की कल्पना किसी ने भी नहीं की थी, आम आदमी पार्टी ने उन तमाम राजनैतिक आंकड़ों को उथल-पुथल कर रख दिया। लोकतंत्र क्या होता है यह देश की जनता को बता दिया। भले ही इसका रूप हमें आज बहुत छोटा नजर आता हो पर कहावत है- ‘‘ देखन में छोटन लगे घाव करे गंभीर’’ जो राजनीति पार्टियाँ अपने अहंकार में मस्त-मस्त हो चल रही है अथवा जो राजनेता इस बात के घमंड में चूर है कि वे सत्ता की ताकत से इस आम आदमी को मिटा देने का जज्बा रखते हैं उनके एक लिए अरविंद केजरीवाल एक सबक है।

दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान से श्री अरविंद केजरीवाल अपनी टीम के साथ शपथ लेने के तुरंत बाद जो भाषण दिया उस भाषण के प्रमुख अंश जो इस प्रकार है। -

अभी हमने मुख्यमंत्री और मेरे साथियों ने मंत्री पद की शपथ ली है। यह सारी लड़ाई जो हमलोगों ने लड़ी थी, यह सारी कबायत जो हमलोगों ने की थी, यह कबायत हमलोगों ने अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाने के लिए नहीं की थी। यह सत्ता के किले तोड़कर सत्ता जनता के हाथ में देने के लिए की थी।

 दोस्तों!! आज आम आदमी की जीत हुई है। दिल्ली के लोगों ने इस बार दिल्ली विधानसभा के चुनाव में एक बहुत बड़ा काम कर के दिखाया है। अभी तक हमलोग, इस देश के लोग बिल्कुल निराश हो चुके थे, हमें लगता था इस देश का कुछ नहीं हो सकता यह देश तो बिल्कुल गर्त में जा रहा है। इस देश की राजनीति ने सब कुछ बर्बाद कर दिया था, लेकिन इसबार दिल्ली विधानसभा के चुनाव में दिल्ली के लोगों ने दिखा दिया कि ईमानदारी से भी राजनीति की जा सकती है। ईमानदारी से चुनाव लड़ें जा सकतें हैं, और ईमानदारी से चुनाव जीते जा सकते हैं।

दोस्तों!  इसके लिये मैं आप सब लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। दिल्ली के लोगों को बधाई देता हूँ। यह एक बहुत बड़ी जीत है, दिल्ली के लोगों की जीत है। मैं परमपिता परमेश्वर, ईश्वर, अल्लाह, वाहेगुरु उनको मैं धन्यवाद देना चाहुँगा। जो यह जीत हुई है, यह वाकई यह कुदरती करिश्मा लगता है। नहीं तो आज से दो साल पहले हमलोग यह सोच भी नहीं सकते थे। इस देश में ऐसी क्रांति आयेगी कि जो जब हम भ्रष्ट पार्टियों को उखाड़ कर फेंक देगें और असल में जनता का राज स्थापित होगा।

दोस्तों!! यह हमारी वजह से नहीं हुआ। यह जरूर कुछ न कुछ कुदरती करिश्मा है। इसके लिये हम भगवान को धन्यवाद अदा करता हूँ, ईश्वर को धन्यवाद अदा करता हूँ अल्लाह का शुक्रिया अदा करता हूँ।

दोस्तों! अभी तो यह शुरूआत है। अभी तो केवल आम आदमी की सरकार बनी है। असली लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। यह लड़ाई हम लोग नहीं लड़ सकते। अरविंद केजरीवाल अकेले नहीं लड़ सकता। हम 6 लोग 7 लोग मिलकर यह लड़ाई नहीं लड़ सकते। लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि अगर दिल्ली के डेढ़ करोड लोग़ एकट्डें हो जायें तो इस देश से दिल्ली से भ्रष्टाचार हम दूर कर सकते हैं। हम मिलकर भ्रष्टाचार दूर कर सकते हैं।

दोस्तों ! हमें यह बिल्कुल गुमान नहीं है, हमें यह बिल्कुल घमंड नहीं है कि सारी समस्याओं का समाधान हमारे पास है। हमारे पास सारी समस्याओं का समाधान नहीं है। भगवान ने सारी बुद्धी हमें नहीं दी है। हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है कि आज सरकार बनेगी, कल सारी समस्याओं का समाधान हो जायेगा। लेकिन हमें यह पूरा यकिन है कि यदि दिल्ली के डेढ़ करोड़ लोग एकट्डा हो गए तो ऐसी कोई समस्या नहीं कि जिसका समाधान हम नहीं निकाल सकते। हमें अब दिल्ली मिलकर चलानी होगी।

अब यह सरकार सिर्फ 7 मंत्री नहीं चलायेगें, सरकार कुछ अफ़सर नहीं चलायेगें, सरकार कुछ पुलिसवाले नहीं चलायेंगें। हमें ऐसी व्यवस्था कायम करगें दिल्ली के अंदर हम डेढ़ करोड़ लोग मिलकर सरकार बनायेगें। डेढ़ करोड़ मिलकर सरकार चलायेगें। 

आम आदमी पार्टी की टोपी पहने अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के सातवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इनके साथ 6 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण किया । दिल्ली के उप राज्यपाल श्री नजीब जंग ने इनको पद की गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह एक ऐतिहासिक वह झण था जिसे दिल्ली वासियों ने ना सिर्फ सुना इस घटना को अमर बना दिया है।
 -शम्भु चौधरी 28/12/2013

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

दिल्ली चुनावः 'आप' ने रचा नया इतिहास


राजनीति में कुछ भी हो सकता है। यह बात चार दिन की आम आदमी पार्टी के उस दावे को झूठलाने के लिए सामने खड़ी है जिसमें ‘आप’ ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में साफ किया था कि उनकी पार्टी ‘‘ना तो किसी का समर्थन लेगी ना देगी। साथ ही इनका प्रमुख सिद्धांत कि ‘‘हम यहां राजनीति करने नहीं - बल्की इसे बदलने आये हैं।’’ यह बात सही है कि जबसे ‘आप’ ने राजनीति मंच पर अपने पैर फैलने शुरु किये हैं, भारत की राजनीति में कई नये प्रयोग हमें देखने को मिल रहें हैं। जिसे अबतक के राजनीति धुरंधर समझ पाने में ना सिर्फ नकाम रहे हैं। जाने-अनजाने में वे जो भी शतरंजी दाव चलते हैं सब ‘आप’ के रणनीतिकारों के सामने रैंगते और घुटने टैकते नजर आते हैं।

चुनावी सर्वेक्षण और सट्टाबजार
जिसप्रकार राजनीतिक पार्टीयाँ चुनाव के पूर्व और बाद के चुनावी सर्वेक्षणों और सट्टाबजार की राजनीति करती रही है इसबार दिल्ली के विधानसभा में इन्हें मुंह की खानी पड़ी है। यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले भी कुछ राज्यों में ऐसा हो चुका है। दिल्ली के चुनाव परिणामों को देखकर ऐसा लगने लगा कि ‘आप’ पार्टी की सोच अन्य राजनीतिक पार्टियों की सोच से अलग हटकर है जिसे भांप पाना आसान नहीं है जितना ये लोग सोचतें हैं। मीडियावाले एक-एक राजनीति दलों के पक्ष में धूंआधार प्रचार और उनके पक्ष में आंकड़े प्रस्तुत करने में लगे थे। पहले कौन बाजी मार ले, इस दौड़ में कुछ मीडिया कर्मी को छोड़ दें तो बाकी बचे सबके सब रस्सा-कस्सी के मैदान में जंग लड़ने को तैयार दिखाई दे रहे थे । शब्दों के जाल बूने जा रहे थे। नये-नये अल्फाजों से इतिहास बूनने की तैयार चल रही थी कि दिल्ली के चुनाव परिणामों ने इनकी तुकाबाजी को विराम लगा दिया। इनको यह बात समझने की है कि सट्टा बाजार की तरह अटकलें लगाना व जाति, धार्मिक आंकडों के जोड़-तोड़ कितना सही है? 

भाजपा का मैदान छोड़कर भागना
चार राज्यों के चुनाव परिणाम के पश्चात जिस प्रकार भाजपा ने 4-0 क मशाल जलाकर दौड़ लगाई यह मशाल दिल्ली तक आते-आते ही बूझने लगी। अंततः भाजपा को 3-1 पर ही संतोष करना पड़ा। जोड़-तोड़ के सिद्धांत को राजनीति की सच्चाई माननेवाली भाजपा जो हरकतें चुनाव के पूर्व करने का प्रयास कर, अपनी सरकार बनाने का दावा पेश कर रही थी। चुनाव परिणाम आते-आते शाम तक इनके पांव-हाथ सूजने लगे थे। डा. हर्षबर्धन जी की ज़ुबान लड़खड़ाने लगी। बोले हमारे पक्ष में आंकड़ें नहीं हैं। हम विपक्ष में बैठेगें। राजनीति के माहिर इनके इस बयान से ना सिर्फ अचंभित थे। जानकारों की बात माने तो यह एक प्रकार से इनकी नैतिक राजनैतिक हार ही मानी जाएगी। जिस नैतिकता का ‘भूत’ भाजपा ने दिल्ली में पाला है यह ‘भूत’ भाजपा को अब आजन्म पीछा छोड़ने वाला नहीं। भले ही इनके पक्ष या विपक्ष में भाजपा जो भी तर्क ये दे दें। भाजपा को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर ही मैदान छोड़ना चाहिये था जो कि ये लोग नहीं कर सके। यह तो ठीक ‘‘खेल के मैदान में दौड़ लगाने से पहले ही भाग लेना’’ सी बात हुई। भाजपा ये सभी बातें ‘‘फ्लोर आॅफ दी हाउस’’ में बहुमत प्रस्तुत करते वक्त भी कह सकती थी। उप राज्यपाल के निमंत्रण से पहले ही भाजपा का इस प्रकार से पहले ही मैदान में फैल जाना फिर इसे आंकड़ों का खेल बताना, प्रमाणित करता है कि भाजपा को अभी भी राजनीति सीखनी होगी।

कांग्रेस पार्टी का समर्थन
सांप्रदायिकता की राजनीति करनेवाली कांग्रेस दिल्ली में महज 8 सीटों पर आकर किसी प्रकार अपनी लाज बचा पाई। प्रायः सभी सीटों पर तीसरे और चौथे स्थान पर आने वाली पार्टी अपने 8 विधायकों के साथ दिल्ली के राजनीति हलचल आज भी बनी हुई है। जबकि इसके विपरीत 32 सीटों वाली भाजपा दिल्ली के खेल में अपना दम पहले ही तोड़ चुकी हैं। इस बात से यह तो पता चलता है कि दिल्ली विधानसभा में भले ही कांग्रेस का सफाया सा हो चुका है पर राजनीति हासिये पर खड़ी अभी भी डूबते को तिनके का सहारा मिला चुका है। दिल्ली के विधानसभा के गठन में अब कांग्रेस का महत्वपूर्ण रोल को नकारा नहीं जा सकता। भले ही कांग्रेस पार्टी का जो भी चरित्र इतिहास रहा हो। इतिहास गवाह है कि कांग्रेस समर्थन देने के मामले में हमेशा से सत्ता गिराने या सत्ता के करीब बना रहने की नियत बनी रहती है। जिस चुनाव में जो ‘आप’ कांग्रेस पार्टी को जी भर-भरकर गालियां दी इनके भ्रष्टाचार को उजागर किया, अभी भी लगातार नये-नये विशेषण से कांग्रेस पार्टी को अलंकृत कर रही है फिर भी थेतर की तरह अपने राजनीति एजेंडे कि  ‘‘हम सांप्रदायिक पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिये ‘आप’ को समर्थन दे रहें हैं।’’ अरे भाई! भाजपा तो पहले ही सत्ता से बहार होने का दावा प्रस्तुत कर चुकी है। अब तो केवल ‘आप’ ही बची है जो आपसे समर्थन भी नहीं मांग रही। फिर भी कांग्रेस की ज़ुबान से सांप्रदायिकता शब्द की भाषा निकलना इस बात की तरफ इशारा करता है कि उनको जो आठ सीटें दिल्ली विधानसभा में मिली है उसका जांच परख की जाये तो साफ हो जाता है कि मुसलमानों के वोट बैंक ने कांग्रेस को 8 सीटों में से 6 सीटें प्रदान की है। यदि मुसलमान कांग्रेस का साथ ना देते तो दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस का सुपड़ा साफ हो जाता।                                                                      
शम्भु चौधरी
21-12-2013