मंगलवार, 26 नवंबर 2013

आरुषि हत्याकांड : सीबीआई सफेद का झूठ?

[HIGHLIGHT: सीबीआई ने मीडिया और देश को गुमराह कर गलत तथ्य देश और कानून के सामने रखने में सफल रही है। परन्तु देश का कानून कहता है कि एक निर्दोष को सजा देने से बेहतर है 10 दोषी को सजा ना मिले। सीबीआई ने जिस प्रकार इस मामले में एक रोचक कहानी के आधार पर तलवर दंपति को सजा दिलाने का प्रयास किया है यह फैसला कानून के इतिहास में काले अक्षरों से दर्ज किया जाना है। ]

सीबीआई सफेद झूठ का पुलंदा है। सबूत जुटाने में असमर्थ इस संस्था के पास सबूत नहीं, सिर्फ कहानी बनाकर मामला चलाने का लाइसेंस प्राप्त है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने भी अपने एक फैसले में कहा दिया कि सीबीआई एक असंवैधानिक संस्था है। इस संस्था को हमेशा के लिए बंद कर एक ऐसी संस्था का गठन समय की मांग हो चुकी है जो देश में बढ़ते आधुनिक अपराधों को जांच करने में सफल हो सके। ऐसी संस्था जो ना सिर्फ देश की सुरक्षा पर पैनी नजर रख सके अपने कार्य को अंजाम तक पंहुचाने के लिए किसी राजनेताओं की सिफारिश का उसे मुहंताज ना होना पड़े।

इन दिनों जिस प्रकार सीबीआई का प्रयोग दुरुपयोग बड़े पैमाने में सामने आया है। जिस प्रकार अन्य आतंकी हमलों में इसको वोट बैंक के लिए प्रयोग किया गया। जिस प्रकार अपने प्रतिद्वंद्वी राजनीतिज्ञों को बदनाम करने या उनके चरित्र को दागदार करने व उनके ऊपर आपराधिक मामले लगाने के आरोप इस संस्था पर लगे हैं इससे इस संस्था की ना सिर्फ इसके साख पर बट्टा लगा है। हमारी देश की सुरक्षा पर भी प्रश्न चिन्ह इस संस्था की करतूतों से लग चुका है। सीबीआई हर जगह ना सिर्फ विफल साबित होती रही है देश का धन बर्बाद करने में इस संस्था को महारत हासिल है एक-एक मामला 25-25 साल चलाना और अपराधियों को कभी बचाना, कभी पकड़ना फिर उसे बचाना इस संस्था का सिर्फ और सिर्फ यही काम हो चुका हैं। सीबीआई के द्वारा जांच होनेवाले आजतक के तमाम मामलों की समीक्षा की जाए तो हमें इस संस्था के परिणाम निराशाजनक लगते हैं। अदालतों को बार-बार इन्हें फटकारना पड़ता है।

आरुषि हत्याकांड में भी इनके क्लोजर रिपोर्ट के बाद तलवार दंपति के निवेदन और अपनी लड़की के लिए न्याय की गुहार लगाते हुए क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था। जिस पर अदालत ने इसे फटकार लगते हुए क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर ही ठीक से इस मामले की जांच का आदेश दिया था। अदालत के निर्देश के बावजूद जब इनको मामला सुलझाने में सफलता नहीं मिली तो सीबीआई ने न्याय की गुहार लगाने वाले तलवार दंपति को ही अपने जाल में फंसा लिय। बोले अब लगाओ न्याय से गुहार? तुम दोनों को ही फाँसी पर झूला डालते हैं। सीबीआई ने जो तथ्य अदालत के सामने रखें हैं वह सबको चौंका देनेवाला है। इनका निष्कर्ष था ‘‘घटना स्थल पर जो चार लोग थे उनमें से दो की हत्या हो चुकी है इसलिए उस स्थल पर जा दो बचे तलवार दंपति ही इस घटना के अपराधी हैं।’’ कितनी मजेदार कहानी है सीबीआई से कोई पूछे तब इस कहानी को गढ़ने के लिए इतना वक्त क्यों लगा यह तो एक बच्चा भी बता देता तो इनके पास सिर्फ धमकी है। सीबीआई को शाबाशी देने का मन करता हैं कि इसने देश के रोंगटे खड़े कर देनेवाली घटना को इतनी आसानी से सुलझा दिया।

सवाल यह उठता है कि तब सीबीआई ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल आखिर क्यों की थी? इस बात से सीबीआई के ऊपर शक की सूई जाती हैं कि यदि कोई अपराधी ही होगा तो वह सीबीआई के इस क्लोजर रिपोर्ट पर खुश होगा कि वह इनके खिलाफ न्यायालय से न्याय की गुहार लगायेगा? इस मामले में सीबीआई खुद की असर्मथता और अपने दोष को एक निर्दोष परिवार पर मढ़ दिया है।

देश का कानून कहानी और शक के आधार पर किसी को अपराधी नहीं करार दे सकता। सीबीआई इस मामले में सबूत जुटाने और तथ्यों को खोजने में पूर्णतः असफल रही है। इस केस से प्रमाणित होता है, सीबीआई सिर्फ देश का पैसा बर्बाद करती है। सीबीआई ने मीडिया और देश को गुमराह कर गलत तथ्य देश और कानून के सामने रखने में सफल रही है। परन्तु देश का कानून कहता है कि एक निर्दोष को सजा देने से बेहतर है 10 दोषी को सजा ना मिले। सीबीआई ने जिस प्रकार इस मामले में एक रोचक कहानी के आधार पर तलवर दंपति को सजा दिलाने का प्रयास किया है यह फैसला कानून के इतिहास में काले अक्षरों से दर्ज किया जाना है। अब लगाओ न्याय से गुहार?

Date: 25-11-2013 [Free copyright]

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