रविवार, 17 मार्च 2019
चाय-पकौड़ा बिचवाया, अब चौकीदारी करो ?
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 12:50 am 0 विचार मंच
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शनिवार, 16 मार्च 2019
भ्रष्टाचार बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 12:09 am 0 विचार मंच
Labels: मोदी, राफेल, शंभु चौधरी
मंगलवार, 12 मार्च 2019
नामुमकिन अब' मुमकिन नहीं ? - शंभु चौधरी
एयर स्ट्राइक के साथ-साथ ही दो झूठे और मनगढंत बात मोदी सरकार की तरफ से जारी की गई-पहला कि - मोदीजी रातभर साये नहीं।दूसरा ‘‘350 आतंकवादी सहित मसूद को छुड़ाने वाला युसूफ भी मारा गया’’ प्रश्न यहीं से उठने शुरू हो गये जब अमित शाह ने 250 आंतकियों के मारे जाने की बात कही, फिर सेना को आकर बयान देना पड़ा कि संख्या सरकार बातायेगी। इस आंकड़ों के झूठ ने एक बार फिर मोदी के झूठ को नंगा कर दिया था।इन सब बातों को कड़ी दर कड़ी जोड़ दिया जाय तो पुलमावा की साजिश में मोदी सरकार की एक करतूत है जो भारतीय सेनाओं की शहादत पर अपनी राजनीति रोटी सैंकने में लगी है।
पुलमावा का हमला, भारतीय सैनिकों की शहादत को लेकर यह आशंका पहले से ही चर्चा में थी जैसे 1990 में बाबरी मस्जिद ढहाने के समय था। सबको पता था कि ऐसा होने जा रहा है ठीक इस बार भी या चर्चा आम थी कि मोदी सैनिकों की कोई बड़ी कार्यवाही कर सकते हैं।
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 7:52 pm 0 विचार मंच
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शुक्रवार, 8 मार्च 2019
चौकीदार के रहते चोरी हो गई ?
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 2:35 am 0 विचार मंच
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गुरुवार, 10 जनवरी 2019
आरक्षण - “Separate but ‘Not’ equal”
उच्चतम अदालत को अपनी उसी परिभाषा को नये सिरे से लिखना होगा जिसमें 1993 में कहा था कि & “Separate but equal” यानि कि 50% - 50% अर्थात अदालत को अब 2019 में 50% = 10% + 40% लिखना होगा यानि कि & “Separate but ‘Not’ equal” ।
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 3:37 am 0 विचार मंच
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बुधवार, 2 जनवरी 2019
चोर की दाढ़ी में तिनका - शंभु चौधरी
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 9:46 pm 0 विचार मंच
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सोमवार, 17 दिसंबर 2018
झूठ बोलना भी कला है
पिछले साढ़े चार सालों में मोदी की सरकार में कुछ ऐसा ही हो रहा है । नोट बंदी से देश को जो घाटा हुआ उसे हमारे वित्तमंत्री जी जीएसटी से पूरा करने की हड़बड़ी की । जब जीएसटी से बात नहीं बनी तो वित्तमंत्री जी आरबीआई में जनता का जमा धन पर डाका डालने पंहुच गये ।
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 10:13 pm 0 विचार मंच
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शनिवार, 15 दिसंबर 2018
बंगाल: लोकतंत्र बचाओ रथ यात्रा
दो दिन पूर्व राफेल सौदे में सुप्रीम कार्ट ने जो एकतरफ़ा सीलबंद लीफाफे के आधार पर बिना प्रतिपक्षों की दलीलों को सुने भारत सरकार के झूठ को अपने कलम से लिख का देना इसे फैसला तो कदापी नहीं माना जा सकता । यह भी एक प्रकार का भ्रष्टाचार को बचाने का प्रयास है। कानून के कार्य में लिप्त कोई व्यक्ति भले ही इसे सही ना माने पर यह फैसला की परिधी में तो कदापि नहीं आ सकता।
कोलकाता: 16 दिसम्बर 2018
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 9:45 pm 0 विचार मंच
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शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018
राफेल - सब कुछ सील है?
भारत की उच्चतम अदालत ने सील बंद लिफाफे में बंद झूठ के सहारा लेकर देश को गुमराह करने का काम किया है। माननीय अदालत का दूसरे पक्षों को सुने बिना ही एकतरफ़ा निर्णय देना खुद में अदालत की गरिमा को आघात पंहुचाता है। मानो अदालत का निर्णय भी सील बंद हो?
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 8:24 pm 0 विचार मंच
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रविवार, 25 नवंबर 2018
व्यंग्य: रामनाम सत्य है-
मोदी जी को पता है कि 2014 में मोदी की लहर 2019 में नहीं हैं । मोदी जी का पता है जनता का एक बहुत बड़ा वर्ग उनके पाले से घसक चुका है । मोदी जी को पता है कि चुनाव आयोग के हाथ बंधे हुएं हैं । उसे पता है कि जिस सीबीआई को उन्होंने बर्वाद कर दिया वह मामला जल्द सुलझने वाला नहीं है ....कोलकाता- 25 नवम्बर 2018
मोदी जी के कार्यकाल के चंद दिन ही गिनती के बचे हैं ओैर इधर पांच विधानसभा के चुनाव क्रमशः राजस्थान, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, मिजोरम और छत्तीसगढ़। इसमें तीन राज्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की हालात बहुत खराब बताई जा रही है। तेलंगना पहले सह तेल भरने गया हुआ है । राजस्थान तो मानो हाथ से निकल ही चुका है मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा अपनी सांप्रदायिक कार्ड को खेल चुकी है। अर्थात बस किसी प्रकार जनता को फिर पांच साल गुमराह किया जाय । भाजपा और पंतजलि के विज्ञापन दाताओं को लगता है कि कहीं यही हाल उनका लोकसभा के चुनाव में ना हो जाय ? सो अभी से विश्व हिन्दू परिषद और आर.एस.एस और महाराष्ट्र का थूकचाटूकार नेता जो महाराष्ट्र में हिन्दीवासी प्रवासियों को पिटवाने में खुद की राजनीति मानतें हैं माननीय उद्धव ठाकरे 70 साल के इतिहास में पहली बार अयेध्या में रामनाम सत्य का नारा लगाने सबके सब पंहुच गये।
कहने का अर्थ है मोदी जी 2019 में नोटबंदी की सफलता पर नहीं, सीबीआई के घमाशान पर नहीं, अपने किये पापों के काले कारनामों पर नहीं, राफेल में हुए भ्रष्टाचार पर नहीं, गैस की किमतों में हुए इजाफे पर नही तेल के दामों हुई लूट पर नहीं, ‘‘अच्छे दिन आयेंगे-कालाधन लायेंगे’’ पर नहीं, सेनाओं की मौत पर नहीं, देश की अर्थव्यवस्था को कंगाली के कगार पर ला दिया पर नहीं, बेरोजगारों के रोजगार पर नहीं, किसानों की मौत पर नहीं, अब या तो कांग्रेस को गाली देगी या फिर अपनी मां को चुनाव में भजाने का प्रयास मोदी जी करेगें।
2019 के चुनाव में मोदी की एक रणनीति साफ दिख रही है वह राममंदिर को लेकर देश में वातावरण को गरम कर देना चाहतें हैं और लोकसभा चुनाव की घोषणा का पहला भाषण होगा’ ‘‘उसे संसद के साथ-साथ राज्यसभा में भी बहुमत चाहिये’’ इसके लिये एक राममंदिर पर झूठा बिल इस बार लोकसभा में लाया जायेगा। जिसे लाकेसभा पारित कर राज्यसभा में भेजेगा कहेगा, देखो हमारी सरकार राज्यसभा में अभी भी अल्पमत है आप मुझे लोकसभा के साथ-साथ राज्य सभा में भी बहुमत दे दो ।
मोदी जी को पता है कि 2014 में मोदी की लहर 2019 में नहीं हैं । मोदी जी का पता है जनता का एक बहुत बड़ा वर्ग उनके पाले से घसक चुका है । मोदी जी को पता है कि चुनाव आयोग के हाथ बंधे हुएं हैं । उसे पता है कि जिस सीबीआई को उन्होंने बर्वाद कर दिया वह मामला जल्द सुलझने वाला नहीं है। वैसे भी सीबीआई उनके लोकसभा चुनाव में बाल भी नहीं उखाड़ के दे सकती । उन्हें पता है कि आरबीआई उनकी बात अब नहीं सुन रही और उन्हें पता है कि सुप्रीमकोर्ट अभी पूर्णरूपेन उनके साथ नहीं खड़ा हो सकता । इधर भाजपा का एक बड़ा खेमा अमित षाह और मोदी के व्यवहार से नाराज चल ही रहा है अरुण षौरी ने तो मोदी के षासन काल को हिटलर से तुलना तक कर ही दी । ऐसे में संघ को लगता है कि कहीं मोदी का ‘‘राम नाम सत्य’’ न हो जाए ? इसके लिये राम का सहारा लेना जरूरी हो गया । जब किसी व्यक्ति को षमशान घाट पंहुचाया जाता है तो लोग इसी बात की जयघोष करतें हैं ‘‘राम नाम सत्य’’ ।
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 8:16 am 0 विचार मंच
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व्यंग्य: सीलबंद लीफाफा
अब मुख्य न्यायाधीश महोदय गोगई को कुछ तो करना ही होगा तो सीलबंद लिफाफे में सारी प्रक्रिया मांगते हुए सरकार को यह भी बोल दिये किसी अदालती आदेश के लिये नहीं बल्कि सिर्फ जनता को गुमराह करने के लिये और मामले को रफा-दफा करने के लिये वे सीलबंद लीफाफे में बस सौदे की क्या प्रक्रिया अपनाई गई है उसे देख लेना चाहते हैं। जैसे सुप्रीम कोर्ट सीलबंद फैसला भी देने लगेगी ? मानो देश में मोदी से जुड़े तमाम भ्रष्ट्राचार के मामले बस सीलबंद ही रहेंगे।कोलकाता- 18 नवम्बर 2018
सुप्रीम कोर्ट इन दिनों सीलबंद लिफाफे के चलते मशहूर हो चला है। राफेल सौदे से लेकर सीबीआई के आलोक वर्मा की जांच तक मानो सड़क पर एक पंडित जी महोदय एक तोते को पिंजड़े से बहार निकालकर सीलबंद एक लिफाफा लाने को कहता है और उस लिफाफे में लिखी बात उस व्यक्ति को बताकर उसका भविष्य बताता है । जब से माननीय रंजन गोगई महोदय सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश बने हैं तब से सीलबंद लिफाफे का रहस्य भी गहराता चला जा रहा है ।
अब राफेल सौदे में क्या रहस्य छुपा है सब तो किस्तों में जनता के सामने सच आ गया कि जिस दिन से मोदी सरकार सत्ता में आई तब से अनिल अंबानी नई कंपनी बननी शुरू कर दी थी। इस साहुकार से कोई यह पूछे कि इन कंपनियों को बनाने के पीछे उनकी मंशा जब राफेल सौदे को लेने की थी ही नहीं तो एक के बाद एक शुरू में तीन कंपनियों का पंजीकरण, फिर दो नई कंपनी का गठन किन कारणों से हुआ? कि क्या साहुकार के साथ-साथ चाौकीदार भी हिस्सेदार हैं देश को लूटने में? जब बात उच्चतम अदालत में पंहुची तो अब मुख्य न्यायाधीश महोदय गोगई को कुछ तो करना ही होगा तो सीलबंद लिफाफे में सारी प्रक्रिया मांगते हुए सरकार को यह भी बोल दिये किसी अदालती आदेश के लिये नहीं बल्कि सिर्फ जनता को गुमराह करने के लिये और मामले को रफा-दफा करने के लिये वे सीलबंद लीफाफे में बस सौदे की क्या प्रक्रिया अपनाई गई है उसे देख लेना चाहते हैं। जैसे सुप्रीम कोर्ट सीलबंद फैसला भी देने लगेगी ? मानो देश में मोदी से जुड़े तमाम भ्रष्ट्राचार के मामले बस सीलबंद ही रहेंगे।
अब सीबआई के मामले में देख लें इनका लिफाफा मीडिया वाले उड़ा लिया। साथ ही सीलबंद लिफाफे में जिस सीवीसी ने जांच की, वह खुद पाप के घड़े से लदा पड़ा है । उसकी जांच में क्या निकलेगा सबको पता है। तो आलोक वर्मा का सीलबंद लिफाफे को ही किसी ने सार्वजनिक कर दिया और उसका ठीकरा आलोक वर्मा के उपर ही फोड़ दिया । अब माननीय गोगई ने यह पहले से ही सोच लिया है कि उनको सिर्फ वही करना है जो चाौकीदार चाहेगा अर्थात राकेश अस्थाना की पुनः नियुक्ति वह भी उस पद पर जिसपर आलोक वर्मा कुछ दिन पूर्व विराजमान थे। कहने का अर्थ है सब कुछ सीलबंद सौदा है।
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 7:09 am 0 विचार मंच
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बुधवार, 7 नवंबर 2018
लोकतंत्र: भाइयों कुछ तो गड़बड़ है?
अभी हाल में ही रिजर्व बैंक का सुरक्षित कोष जो कि देश की जनता का धन है उसका एक तिहाई हिस्सा सरकार उन लुटेरों अडानी, अनील अंबनी व नीरव मोदी जैसे देश के महान लुटारों, जिन्होंने देश लूटने में उनको मदद की थी के खातों में डाल देने का दबाव बना रही है । एक बात पुनः यहां उल्लेख करना चाहता हूँ पंतलजि का विज्ञापन लोकतंत्र को धराशाही करने में मोदी सरकार को सहयोग कर रहा है यह बात कई बार प्रमाणित हो चुकी है ।
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प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 9:16 pm 0 विचार मंच
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शुक्रवार, 2 नवंबर 2018
चुनाव-2019: भेड़िया आया
इस बार के चुनाव में इस बालक को पहले से अंदाज हो चुका है कि उसे लोक सभा चुनाव की घोषणा के ठीक पहले होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ सकता है। जिसमें राजस्थान, तेलंगाना मध्य प्रदेश और मिजोरम और छत्तीसगढ़। इसमें तीन राज्यों राजस्थान, तेलंगाना मध्य प्रदेश में भाजपा की हालात बहुत खराब बताई जा रही है। इन सभी राज्यों में लोकसभा की 83 सीटें हैं। यदि हम प्रमुख तीन राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और मिजोरम और छत्तीसगढ़ की बात करें इन तीन राज्यों में भाजपा के पास अभी 16वीं लोकसभा की 61 सीटें हैं। भाजपा को लगता इन राज्यों में हमने जनता को इतना छल्ला है कि अब धोखे से भी हमारी बात में नहीं आयेगें। विधानसभा चुनाव से उनके तलवे की जमीं अभी से ही खिसकती दिखाई दे रही है।
आज एक पंचतंत्र की कहानी सही साबित हो रही चालाक सियार ने शेर के खोल धारण कर लिया है। आरएसएस की मुंबई में हुए तीन दिवसीय शिविर के समापन में संघ के महासचिव व भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने नया सगुफा छोड़ दिया । एक चोर साहुकार बनकर दूसरे चोर को चेतावनी दे डाली कि ‘‘राम मंदिर को लेकर पुनः 1992 जैसा आंदोलन करेगी’’ । पिछले 70 सालों में संघ का यह चेहरा नया नहीं है । हर चुनावी मौसम में संघ कोई न कोई नया पैंतरा दिखाता रही है।
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 10:17 pm 0 विचार मंच
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गुरुवार, 1 नवंबर 2018
चुनाव-2019: काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती
भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 में भारत के चुनाव आयोग को इसका अधिकार दिया गया है। वहीं अनुच्छेद 83(2) में इसका कार्यकाल 5 वर्ष का तय किया गया और आपात किसी स्थिति में एक साल का कार्यकाल संसद में कानून बना के बढ़ाया जा सकता है । वहीं भारत के नागरिकता कानून, 1951 की धारा 14 में नई लोकसभा गठन की प्रक्रिया दी गई है। जिसमें लिखा है कि नई लोकसभा के गठन के लिए आम चुनाव करायें जायेगें । इसके लिए पूर्व की लोकसभा की समाप्ति जो कि जून 2019 में हो जायेगी के छः माह अर्थात 1 दिसम्बर-2018 से 30 मई 2019 के बीच चुनाव की सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर लेनी होगी । अर्थात 16वीं लोकसभा की उलटी गनती शुरू हो चुकी है।
- आज हमें सोचना होगा कि क्या हम लोकतंत्र की रक्षा करना चाहते हैं कि बाबा रामदेव के विज्ञापनों के पीछे कुत्ते की तरह दुम हिल्लाकर अपनी कलम को, पत्रकारिता को गिरबी रखना चाहतें हैं?
- आज हमें सोचना होगा कि धर्म की आड़ लेकर जो भेड़िया हमें पिछले 25 सालों से नोचता रहा वह पुनः उसी खाल में हमें लुटने तो नहीं आ रहा?
- आज हमें सोचना होगा जिसने 2014 के चुनाव में हमें जो सपने दिखाये थे उसका क्या हुआ।
- आज हमें साचेना होगा घरों की रसोई की गैस में ऐसी कौन सी आग लग गई की मोदी सरकार ने पांच सालों में इसके मूल्य को 400 से 900 कर दिये?
- आज हमें यह भी सोचना होगा जिस लोकपाल के गठन को लेकर पूरा देश आंदोलनरत हो चुका था, उसका गठन मोदी सरकार ने क्यों नहीं किया?
- ऐसे हजार सवाल हो सकते हैं साथ ही एक सवाल यह भी उठता है कि मोदी नहीं तो फिर कौन?
- स्वाल बहुत गंभीर है। क्या हमारे पास कोई विकल्प नहीं? क्या एक सवाल यह भी किया जा सकता है मोदी ने इन पांच सालों में हमारी सोच को भी विकलांग बना दिया कि हम किसी विकल्प की बात भी नहीं सोच सकते? जयहिन्द !
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 9:42 pm 1 विचार मंच
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बुधवार, 10 अक्टूबर 2018
राफेल सौदा बनाम मोदी की सुरक्षा?
राफेल सौदा बनाम देश मोदी की सुरक्षा?
तब बोफोर्स का मामला किसकी सुरक्षा से जुड़ा था ?
भारत सरकार के अटार्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा कि
भारत सरकार के अटार्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा कि "अदालत को इसमें दखल नहीं देना चाहिए ।ये नेशनल सिक्योरिटी का मामला है । ये जनहित याचिका नहीं है बल्कि राजनीति से प्रेरित याचिका है। यह सीधे प्रधानमंत्री से जुड़ा मामला है ।"
प्रकाशक: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary द्वारा 2:27 pm 0 विचार मंच
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