शनिवार, 15 दिसंबर 2018

बंगाल: लोकतंत्र बचाओ रथ यात्रा

दो दिन पूर्व राफेल सौदे में सुप्रीम कार्ट ने जो एकतरफ़ा सीलबंद लीफाफे के आधार पर बिना प्रतिपक्षों की दलीलों को सुने भारत सरकार के झूठ को अपने कलम से लिख का देना इसे  फैसला तो कदापी नहीं माना जा सकता । यह भी एक प्रकार का भ्रष्टाचार को बचाने का प्रयास है। कानून के कार्य में लिप्त कोई व्यक्ति भले ही इसे सही ना माने पर यह फैसला की परिधी में तो कदापि नहीं आ सकता।

कोलकाता: 16 दिसम्बर 2018

लोकसभा चुनाव से ठीक पूर्व देश में पांच बड़ी घटना घटी: पहला- सीबीआई के दो प्रमुखों में भ्रष्टाचार के आरोप पर आपस में ही घमासान होना, दूसरा- मोदी के आदेश पर नियुक्त अर्जित पटेल का सरकार द्वारा आरबीआई के खज़ाने को हड़पने के प्रयास के विरूद्ध त्यागपत्र देना, तीसरा- चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव अधिकारी के रूप में अपने ही प्यादे सुनील अरोरा की नियुक्ति, चाौथा- पांच राज्यों के विधान सभाओं के चुनाव में करारी हार और पांचवा- सुप्रीम कोर्ट का लिफाफा बंद फैसला ।
जो भाजपा बंगाल में लोकतंत्र बचाओ रथयात्रा निकालने की बात कर रही है उसी भाजपा सरकार के सारे कृत्य देश के लोकतंत्र को मटीयामेट करने में लगी है । चाहे वह सुप्रीम कोर्ट में प्रमुख की नियुक्ति में हेराफेरी का मामला हो या फिर सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति का मामला हो। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के ही चार जजों ने देश के इतिहास में पहली बार प्रेस के सामने आकर कहा था कि ‘‘ सबकुछ ठीक नहीं चल रहा’’  इसे आम साधारण घटना नहीं मानी जा सकती ।
दो दिन पूर्व राफेल सौदे में सुप्रीम कार्ट ने जो एकतरफ़ा सीलबंद लीफाफे के आधार पर बिना प्रतिपक्षों की दलीलों को सुने भारत सरकार के झूठ को अपने कलम से लिख का देना इसे  फैसला तो कदापी नहीं माना जा सकता । यह भी एक प्रकार का भ्रष्टाचार को बचाने का प्रयास है। कानून के कार्य में लिप्त कोई व्यक्ति भले ही इसे सही ना माने पर यह फैसला की परिधी में तो कदापि नहीं आ सकता।
जो भाजपा की  मोदी   सरकार लोकतंत्र की हत्या पर हत्या किये जा रही है । यदि इसे ही लोकतंत्र कहा जा रहा है तो निश्चय ही लोकतंत्र पर खतरा मंडरा रहा है।
जिस प्रकार बाबा रामदेव की कंपनी में इसकी कुल संपदा पिछले चार सालों में 850 करोड़ की कंपनी का 11526 करोड़ की कंपनी हो जाना और इसके विज्ञापनों के माध्यम से लोकतंत्र का हरण करना भी निश्चय रूप से किसी बड़े खतरे को संकेत देता है।
जिस प्रकार मोदी की सरकार ने चंद बड़े घरानों के लिए आते ही जमीन अधिग्रहण बिल लाये थे, जिस प्रकार मोदी ने नोटबंदी का फरमान लागू किया था, जिस प्रकार कश्मीर की विधानसभा को भंग किया गया, जिस प्रकार वहां गोवा में भाजपा की सरकार बनी, जिसप्रकर मोदीजी निजी फायदे और अनिल अंबानी को लाभ दिलाने के लिये भारत के वायु सेनाध्यक्ष से राफेल के पक्ष में बुलवना निश्चित तौर पर लोकतंत्र के लिये किसी खतरे से कम नहीं।
बंगाल में सबको पता है कि हर साल दिसम्बर से जनवरी माह तक गंगा सागर तीर्थयात्रियों का भारी जमावड़ा होता है देशभर से लगभग हर साल लाखों की संख्या में तीर्थयात्रियों का अगमन शुरू हो जाता है। ऐसे में भाजपा के द्वारा इस शांत क्षेत्र में धार्मिक उत्तेजना फैलाने की साज़िश कर रही है यह निश्चय ही लोकतंत्र के लिये किसी खतरे की ओर संकेत दे रहा है । यदि सच में भाजपा लोकतंत्र के प्रति इतनी चिंतित है तो उसे मोदी को सत्ता से हटाने पर विचार करना चाहिये।
शंभु चौधरीलेखक एक स्वतंत्र पत्रकार हैं  विधि विशेषज्ञ भी है।

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