रविवार, 19 अप्रैल 2020

कोविड-19 या हिन्दू-मुस्लिम ?

....शंभु चौधरी, कोलकाता ।

        19 अप्रैल 2020, कोलकाता (भारत): भारत के प्रधानमंत्री ने आज बहुत अच्छी बात कही कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए सभी संप्रदाय के लोग एकजुट हो । ‘‘कोविड-19 जो किसी जाति, धर्म, रंग, पंथ, भाषा या सीमाओं को नहीं देखता। हमें एकता और भाईचारे को प्रधानता प्रदान करनी चाहिए।’’ साथ ही अंत में एक द्विअर्थी पंक्ति भी जोड़ दी।  "We are in this together : PM"  इसका अर्थ तो प्रधानमंत्री जी ही समझा सकते हैं कि उनके दिमाग में क्या चल रहा था इन शब्दों का चयन करते समय ? आम साधारण भाषा में तो इसका अर्थ यही लगाया जा सकता है। क्या सिर्फ कोरोना को लेकर ही हम एक हों बाकी विषय पर नहीं?

       
सब्जीवालों को भगवा झंडा लगा कर सब्जी बेचते
आजकल देश में एक साथ दो प्रकार की लड़ाई चल रही है पहली तो ‘कोविड-19’’ की लड़ाई तेजी से रफ्तार लेने लगी है। आजतक देश में कुल सोलह हजार से भी अधिक मामले सामने आ चुके हैं जैसे-जैसे जांच की रफ्तार तेज होगी इनकी संख्या एक लाख से भी ऊपर जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जिसमें अब तक 519 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। राहत कि बात इतनी ही है कि इनमें स्वस्थ हो कर घर वापस लौटने वालों की संख्या 2310 है। जांच की रफ्तार जितनी मंद गति से चलेगी उतनी ही तेज गति से कोरोना भारत के गांव व कस्बों को अपनी चपेट में ले लेगा। बिहार जैसे राज्य जहाँ बाढ़ के पानी के आने का हर साल इंतजार रहता है अभी तक नीतीश कुमार जी की सरकार तिनके से घोड़े को घास खिला रहे हैं वहीं बंगाल, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र की सरकारों के तले से जमीन सरकती नजर आ रही है। दरअसल इन राज्य के नेताओं को कोरोना का रोना सिर्फ दिखावा लगता है। ऐसे राज्यों को सेना के हवाले कर देना चाहिये जिन-जिन राज्यों के मुख्यमंत्री असक्षम हो या जिनके पकड़ में नहीं है।
        
        देश में इन दिनों कोरोना की महामारी के बीच हिन्दू-मुस्लिम की महामारी भी तेजी से फैल चुकी है। घर-घर में इस बात को लेकर तनाव पैदा कर दिया गया है अब सब्जीवालों को भगवा झंडा लगा कर सब्जी बेचते आसानी से देखा जा सकता है। यह प्रधानमंत्री जी के उक्त बयान की भी पुष्टि करता है कि जहर किस कदर समाज में फैलाया गया है। चित्र देखें।

        आये दिन कभी किसी गैर भाजपाई राजनेताओं के नाम से अफवाहें फैलाना तो कभी पुराने वीडियों को नये ठंग से सांप्रदायिक जमा पहनाना मानो भारत सरकार से इनको अफवाहों को फैलाने का लाइसेंस मिल चुका है।। धडल्ले से आप इनको फेसबुक या ट्विटर पर पोस्ट करते देखें जा सकते है। 

        शुक्रवार [17.04.2020] की ही एक घटना है गत शुक्रवार को महाराष्ट्र के पालघर गांव के कासा पुलिस थाने के अन्र्तगत एक घटना घटी । स्थानीय कलेक्टर कैलास शिंदे के अनुसार, सुशील गिरि महाराज (35), चिकेन महाराज (70) और ड्राइवर नीलेश तेलगड़े (30) अपने किसी व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए महाराष्ट्र से सूरत (गुजरात) जा रहे थे, लॉकडाउन की वजह से ये लोग गांव के रास्ते को चुन लिये थे ताकि रास्ते में कोई व्यवधान उत्पन्न ना हो जाए ।
इस घटना हिन्दू-मुस्लिम समझा जाय चुकि मरने वाले साधु-संत के वेश में थे ?
जब ये लोग पालघर गांव के एक ग्रामीण कस्बा गडचांचल से निकल रहे थे रात के लगभग 10 बजे उन्हें गांववालों ने पकड़ लिया । यह कस्बा आदिवासी बाहुल इलाका माना जाता है। मौके पर पुलिस भी पहुच चुकी थी ।  लॉकडाउन के मद्देनजर, पालघर जिले के ग्रामीण आदिवासी इलाकों में कई तरह की अफवाह फैल रही थी, जिसमें कुछ असामाजिक तत्व चोर, लुटेरे और अपहरणकर्ता वेश बदल कर गांव में आ सकते हैं बच्चों के चोरी की अफवाह उसमें से एक थी। आदीवासी ग्रामीणों ने इन तीनों पर संदेह के आधार पर धर दबोचा और पुलिस के सामने ही उन तीनों की सैकड़ों गांव वालों ने मिलकर उनकी हत्या कर दी। आरोपियों के खिलाफ कासा पुलिस स्टेशन में धारा  302, 120 (E) 427, 147, 148, 149/307, 353, 333, 323, 341 के तहत कुल तीन मामले दर्ज किए गए हैं। 110 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनमें से नौ 18 वर्ष से कम उम्र के हैं । यहां यह सोचने कि बात है कि सर्वप्रथम इस घटना हिन्दू-मुस्लिम समझा जाय चुकि मरने वाले साधु-संत के वेश में थे ? कि इसे साधारण मोबलांचिंग । दूसरा सबसे बड़ा सवाल यह भी उठता है कि घटनास्थल के वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वह साधु जिसकी उम्र लगभग 60-70 दिखती है बार-बार पुलिस को पकड़ कर खुद को बचाने की गुहार लगाता है। और घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी बार-बार हट रहा है उससे खुद को अलग कर रहा है । इससे दो बात तो साफ हो जाती है कि मारनेवाले यदि एक बार हम मान भी ले कि सबके सब मुसलमान हैं जैसा कि अंधभक्त दावा कर रहें हैं। तो क्या महाराष्ट्र की पुलिस जो उस समय घटनास्थल पर दिख रही है वह भी मुसलमान ही थी क्या? जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है भारत सरकार उन लोगों का धर्म भी उजागर करे ताकि इस तरह की अफवाहों को विराम लगाया जा सके। -जयहिन्द।

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