शुक्रवार, 5 दिसंबर 2008

करो खिदमत धक्कों से

आतंकी को नही मिलेगी जमीं दफ़न होने को

अपना तो ये हाल कि बंधू अश्क नही रोने को

आंसू सारे बह निकले है, नयन गए हैं सूख

२६ से बेचैन पडा हूँ, लगी नही है भूख

लगी नही है भूख, तन्हा टीवी देख रहे हैं

उन ने फेंके बम-बारूद, ये अपनी सेंक रहे हैं

सुनो कुंवर की बात खरी, ये मंत्री लगते छक्कों से

जाने वाले नही भाइयों, करो खिदमत धक्कों से

कुंवर प्रीतम

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