नहीं रहे.... अमर गीत
धरती धोरां री !
आ तो सुरगां नै सरमावै,
ईं पर देव रमण नै आवै,
ईं रो जस नर नारी गावै,
धरती धोरां री !
के रचनाकार
युगकवि श्री कन्हैयालाल सेठिया
कथा-व्यथा की तरफ से हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि
कथा-व्यथा का इस माह का अंक श्री सेठिया जी को समर्पित
http://kathavyatha.blogspot.com/
नोट: अगले माह हेतु आपकी नई सामग्री आमंत्रित की जाती है।
शम्भु चौधरी
संपादक,
कथा-व्यथा
1. ई- साहित्य प्रकाशन करना
2. ई-पत्रिका 'कथा-व्यथा' का प्रकाशन
3. कवि मंच
4. मंच समाचार
सामाजिक, साहित्यिक, धार्मिक विषयों का खुला मंच
गुरुवार, १३ नवम्बर २००८
नहीं रहे.... अमर गीत 'धरती धोरां री' के रचनाकार
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

0 विचार मंच:
हिन्दी लिखने के लिये नीचे दिये बॉक्स का प्रयोग करें - ई-हिन्दी साहित्य सभा