शनिवार, 28 अगस्त 2010

परिंदा -शम्भु चौधरी

Shambhu Choudhary
(नक्सलवाद पर लिखी एक कविता)
एक परिंदा घर पर आया, फर्राया-चहकाया..
मैं आजाद.., मैं आजाद.., मैं आजाद..,

मैं सोचा यह क्या कहता है?
हँसता है या रोता है।
मुझको गाली देता है या अपना दुःख यह कहता है़।

एक परिंदा घर पर आया, फर्राया-चहकाया..
मैं आजाद.., मैं आजाद.., मैं आजाद..,

खेत को काटा, जंगल काटा
वन को नोचा, पहाड़*1 तोड़ा
घर को तहस-नहस कर छोड़ा
पर न माना, फिर चहकाया...
मैं आजाद.., मैं आजाद.., मैं आजाद..,

समझाया....
तुम अनपढ़ और गंवार हो।
लोकतंत्र की गंगा#2 बहती,
गंदे, नाले, पोखर सब सहती
गंगा#3 को 'गंगा'#4 करने का
२ खोखा#5 मिलता हर साल।

एक परिंदा घर पर आया, फर्राया-चहकाया..
मैं आजाद.., मैं आजाद.., मैं आजाद..,

मैं सोचा यह क्या कहता है?
हँसता है या रोता है।
मुझको गाली देता है या अपना दुःख यह कहता है़।

समझ न पाया,
#7शेर को भेजा, भेंड़ को भेजा,
भालू, बन्दर, हाथी भेजा,
शिकारी भेजा, जाल बिछाया,
पकड़ कर लाया, फिर धमकाया
नहीं समझने पर मरवाया
फिर भी समझ न पाया।
खेत, पहाड़, जंगल को लुटा,
फिर भी लुट न पाया।

मैं सोचा यह क्या कहता है?
हँसता है या रोता है।
मुझको गाली देता है या अपना दुःख यह कहता है़।
एक परिंदा घर पर आया, फर्राया-चहकाया..
मैं आजाद.., मैं आजाद.., मैं आजाद..,

(रचना दिनांक २९ अगस्त २०१० को सुबह लिखी है।)
कवि का पता: शम्भु चौधरी, एफ.डी.-४५३/२, साल्टलेक सिटी, कोलकाता-७००१०६

*1. दर-असल में आदिवासी पर्वत शब्द की जगह पहाड़ का प्रयोग ज्यादा करतें हैं।
#2. गंगा शब्द संसद का प्रर्यावाची है।
#3. यहाँ गंगा शब्द का अर्थ "गंगा" से है।
#4. यहाँ गंगा शब्द का अर्थ शुद्ध करने से है।
#5. एक सांसद को हर साल २ करोड़ रुपये हराम के विकास के नाम से सरकार से मिलते हैं, जिस रकम को ९०% सांसद हड़प जाते है।
#6. पार्टी के पालतु कुत्ते बन कर संसद मेँ बन्द रहना पड़ता है।
#7. ऑपरेशन हन्ट- नक्सलवाद कि खिलाफ चलरहा जिसमें सैनिक जनवरों के तरह ऑपरेशन करते हैं।

4 विचार मंच:

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महेन्द्र मिश्र ने कहा…

नक्सलवाद पर आधारित ""परिंदा"" बहुत बढ़िया रचना लगी. ...

DEEPAK BABA ने कहा…

... शब्द नहीं है परिंदा के लिए......

गंगा और गंगा का सही चित्रण किया आपने ..


खोखा ....... शब्द सुना था ....... आ लिखा हुवा पढ़ लिया......

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत दिन बाद आ पाया यहाँ ! आप बढ़िया काम कर रहे हैं हार्दिक शुभकामनायें !!

Rahul Kumar Paliwal ने कहा…

एक आग को छूकर अच्छा लगा...............................

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कही भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए.
सिर्फ हंगामे खड़े करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश हैं कि ये सूरत बदलनी चाहिए |

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