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सोमवार, 25 मई 2020

कोरोना को मात कैसे दें?

भारत में पूर्ण लाॅकडान के बाबजूद कोरोना के संक्रमक को रोकने में हम पूरी तरह से सफल नहीं हो सके। जिस दिन लाॅकडाउन शुरू हुआ था तब मामले 727 थे, जो आज इस लेख को लिखने तक मामले बढ़ कर हो गए एक लाख चालिस हजार के आस-पास (138,845 as on 25th May 2020) अर्थात लाॅकडाउन  कोरोना का पूर्ण समाधान नहीं हैं । हमें खुद को तैयार करना होगा। भयमुक्त हो कर हमें कोरोना से लड़ने की जरूरत है।  
इसके लिए हमें दो उपाय करने होगें।
1. खुद का बचाव कैसे करें और
2. दूसरों को कैसे बचायें।


बस याद रखना है। 
A B C D, और 3 लीटर गर्म पानी / अन्य गर्म पेय जैसे दूध,चाय,कॉफी 
बुखार होने पर 
Paracetamol-650/500 [six to eight hours interval  and as per prescribed by Doctors]

ऐसे वायरस के संक्रमण से बचने के लिए अपनी इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग बनाना बेहद जरूरी है। डॉक्टर्स का मानना है कि  विटामिन ए, बी, सी तथा डी  जो कि इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, का सेवन लाभ दायक है।

विटामिन -'A' सब्जियों और फलों के सेवन से आसानी से विटामिन 'ए' की पूर्ति की जा सकती है। शरीर में विटामिन 'ए' की भरपाई करने के लिए अंडा, गाय का दूध, गाजर, पीली या नारंगी सब्जियां, पालक, स्वीट पोटेटो, पपीता, दही, सोयाबीन और दूसरी पत्तेदार हरी सब्जियां का सेवन किया जा सकता है। 

विटामिन -'B'
 • गाय का दूध और उसके बने हुए उत्पादों जैसे दही, पनीर, मक्खन । 

• टमाटर एक अम्ल है। इसमें ऑक्जेलिक एसिड की मात्रा भी होती है, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें विटामिन बी भरपूर मात्रा में है। 

विटामिन -'C' 
विटामिन सी सबसे ज्यादा खट्टे फलों में मौजूद होता है जैसे संतरा, मौसमी, किन्नू, स्ट्रॉबेरी, जामुन, आंवला, नींबू, ब्रॉकली, पालक, शिमला मिर्च,  और पपीता। 

 विटामिन -'D'  
• गाय का दूध (Cow Milk)( विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञ और पोषण विशेषज्ञ दैनिक आहार में एक गिलास गाय के दूध लेने का सुझाव देते हैं, जो विटामिन डी की आपकी दैनिक जरूरत का 20% देता है। गाय का दूध में विटामिन डी और कैल्शियम का एक बड़ा स्रोत है। 
• संतरे के रस में विटामिन डी और विटामिन सी की अच्छी मात्रा होती है। 

एक्सरसाइज : इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए डाइट में एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन से भरपूर फल और सब्जियों को तो शामिल करें ही लेकिन साथ ही एक्सरसाइज/योग को भी अपनी रूटीन का हिस्सा बनाएं। 

ध्यान दें: भारत सरकार की गाइड लाइन के अनुसार काढ़ा भी इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, काढ़ा का सेवन भी लाभ दायक है।

रविवार, 17 मई 2020

‘‘एको अहं, द्वितीयो नास्ति’’ - शंभु चौधरी

17 May 2020 कोलकाता (भारत):

मित्रों ! आपने गुब्बारे वाले को जरूर देखा होगा । वह गुब्बारे बेचता है और जो नहीं बिकता उसे हवा में उड़ा देता है। बीस लाख करोड़ का गुब्बारा इन मजदूरों के लिए बस आकाश में उड़ते बैलून की तरह ही है। मजदूरों के दर्द को दरकिनार कर, हम आत्मनिर्भता की बात कर रहें हैं । ऐसी आत्मनिर्भरता का परिणाम तो बीस सालों में भी नहीं आयेगा।
भारत के अद्वितीय प्रधानमंत्रीजी एको अहं, द्वितीयो नास्ति मोदीजी पिछले दिनों कोरोना की इस महामारी के बीच चौथी या पांचवीं बार राष्ट्र को संबोधन करने आये । इससे पहले वे तीन या चार बार देश को संबोधन कर चुके थे। जहाँ तक मेरी मैमोरी ठीक हो तो शायद एक बार जनता कफ्र्यू के लिए, दूसरी बार थाली पिटवाने के लिए, तीसरी बार दीया जलवाने और चौथी बार मन की बात के लिए और अबकि बार राहत पंहुचाने आये । लोगों को यह आशा थी कि इस बार लाॅकडाउन फेज - 4 की घोषणा भी मोदी जी कुछ न कुछ पिटवाकर करेगें। भले ही वह लोगों का सर ही क्यों न हो पिटवा दें पर कुछ न कुछ तो कर के ही रहेगें शांति से न तो खुद रहेगें न किसी को रहने देगें।  आपको लाॅकडाउन फेज - 3 में भी नहीं छोड़े, खुद नहीं आये तो क्या देश के तीन बहादुरों को सर्जिकल स्ट्राइक करने अस्पतालों में भेज दिये, आखिर देश की सुरक्षा से जो जुड़ा था । रातों-रात तीनों सेना के जवान सजग हो गए और लगे गरीब लोगों की मौत पर फूल बरसाने।  लाॅकउाउन फेज -3 तो अपने आप में ऐतिहासिक यादगार तस्वीरें हमें दे गया हें । सेना के तीनों सेनाध्यक्षों ने वह कर दिखाया जो ‘‘न भूतो न भविष्यति’’ संभव हो सकेगा ।

अपने-अपने घरों में पिछले 50 दिनों से कैद देश की 128 करोड़ जनता टीवी पर, प्रधानमंत्रीजी ‘‘एको अहं, द्वितीयो नास्ति ’’ मोदीजी को सुनने को बेताब थी। बचे दो करोड़ गरीब मजदूर जो देश के विभिन्न एनएच की शानदार सड़कों पर भूखे-प्यासे, मरते-मरते अपने प्रधानसेवक जी को सुनने के लिए ठीक आठ बजे अपनी-अपनी यात्रा स्थगित कर दी थी। सबको आशा थी कि आज उनके दर्द को प्रधानमंत्रीजी जरूर सुन लेगें । उनके (प्रधानसेवकजी) आंखों में फिर से दर्द के आंसू झलकेगें। कुछ पल रोयेंगे, फिर रुमाल से आंसूओं को पूंछकर भावक शब्दों से हमें कुछ बोलेंगे। पल-पल गुजरता गया, मोदी जी का भाषण समाप्त हो चुका था । राहत के नाम पर जो कुछ सुना उन गरीबों के पले तो बस इतना ही पड़ा कि मोदी जी कुछ बोले हैं जो उनकी समझ में नहीं आया सो अब भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमणजी चार दिन उसे समझाने रोज शाम चार बजे आयेंगी ।

सबको आशा थी कि आज उनके दर्द को प्रधानमंत्रीजी जरूर सुन लेगें । उनके (प्रधानसेवकजी) आंखों में फिर से दर्द के आंसू झलकेगें। कुछ पल रोयेंगे, फिर रुमाल से आंसूओं को पूंछकर भावक शब्दों से हमें कुछ बोलेंगे। पल-पल गुजरता गया, मोदी जी का भाषण समाप्त हो चुका था । राहत के नाम पर जो कुछ सुना उन गरीबों के पले तो बस इतना ही पड़ा कि मोदी जी कुछ बोले हैं जो उनकी समझ में नहीं आया सो अब भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमणजी चार दिन उसे समझाने रोज शाम चार बजे आयेंगी । 

छात्रों के लिए बसों व ट्रेनों की व्यवस्था की गई । विभिन्न प्रान्तों में बसे प्रवासी मजदूरों के लिये श्रमिक ट्रेन भी चलवा दी । विदेशों में फंसे लोगों के लिए ‘‘वंदे भारत मिशन’’ शुरू कर दिया गया। परन्तु जो लोग गलती से ही सही,सड़क के मार्ग से गांव के लिए चल पड़े, उनका क्या होगा? ये लोग अब भी यह आस लगाये बैठे थे कि शायद अब तो इनकी बारी आ ही जायेगी। इनका दोष सिर्फ इतना ही था कि इनको एक माह से न तो राशन मिला ना ही इनके मालिकों ने इन्हें पैसे दिये थे । रोज कमाने, रोज खाने वाले दिहाड़ी मजदूर थे ये सब, जिनको लगा कि अब कुछ अनर्थ हो जायेगा । मरना तो था ही क्यों न गांव ही चल दिया जाय । इनके पास जो कुछ था, लेकर गांव की तरफ पैदल ही चल पड़े सैकडों मील की यात्रा पर ।

प्रधानसेवक जी के बीस मिनट के भाषण में इन लाखों मजदूरों को मोदीजी की बुलैट ट्रेन ने मिनटों में कूचल कर रख दिया। मजदूर आंखों में आंसू बहाते, खून का घूंट पीकर रह गये । जो बच्चे कल तक मोदी-मोदी चिल्लाते नहीं थक रहे थे वही आज भारत की शानदार सड़कों पर दम तौड़ते नजर आ रहे थे। 

रोजान रास्ते में नये हादसे के शिकार ये मजदूर बड़ी संख्या में सरकार से वड़ी उम्मीद लिए बैठे थे, परन्तु प्रधानसेवक जी के बीस मिनट के भाषण में इन लाखों मजदूरों को मोदीजी की बुलैट ट्रेन ने मिनटों में कूचल कर रख दिया। मजदूर आंखों में आंसू बहाते, खून का घूंट पीकर रह गये । जो बच्चे कल तक मोदी-मोदी चिल्लाते नहीं थक रहे थे वही आज भारत की शानदार सड़कों पर दम तौड़ते नजर आ रहे थे। इस घटना ने नोटबंदी के दर्द को भी बौना बना दिया था। नोटबंदी में जब लाखों लोगों को अचानक से मोदीजी ने सड़कों पर ला खड़ा कर दिया गया था । तब की घटना लोगों ने यह कह कर सह लिया कि इससे देश का भला होगा । जबकि सच्चाई यह है कि मध्यम परिवार आज भी उस सदमे से उबर नहीं पाया है। तब भी मोदी भक्तों (मां-बहनों की गाली देने वालों ) के पास इसका जबाब तैयार था और आज भी तैयार है। देश के सारे मंत्री से लेकर संत्री तक, राष्ट्रपति से लेकर राज्यपाल तक, प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सबके जबान को लकवा मार गया था, किसी की हिम्मत तक नहीं हो पा रही थी कि इन मजदूरों को कोई राहत भी पंहुचा दे । सड़क मार्ग में सरकार के गुमास्तों ने जमकर लूट मचा रखी थी। खाने के समान से लेकर बच्चों के दूध तक को नहीं छोड़ा। पैसे और औरतों की इज्जत की तो बात कोई ज़ुबान पर ला भी नहीं सकता । मानो सबकुछ रामराज्य था । कुछ मददगारों को तो प्रशासन की धमकी भी मिल गई । ट्रकों से लोगों को उतार दिया गया। पानी की बोतलें तक नहीं छोड़ी इन लोगों ने। कोई रेल के रास्ते छुप कर गांव जा रहा था तो कोई गांव के रास्ते । दर-दर की ठोकरें खाते इन लोगों की एक आफत नहीं थी, जब ये लोग किसी तरह अपने राज्य की शरहद पंहुच भी जाते तो इनके सामने नई आफत आ खड़ी होती, इनके लिए स्व के राज्य में भी प्रवेश के मार्ग बंद कर दिये गये। जांच व गांव भेजने के नाम से इनको लूटा गया ।  एक बस का भाड़ा इनसे एक लाख तक वसुला गया। ये सभी बातें प्रमाणित हो चुकी है।

कोरोना की इस महामारी ने एक साथ कई जख्मों को हरा  (green)  कर दिया था। यदि आपने ‘‘वंदे भारत मिशन’’ चलाया, यदि आपने श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई, तो इन मजदूरों ने जो कि पिछले एक माह से सड़कों पर फंस चुके हैं उन्होंने कौन सा अपराध कर दिया कि सरकार इतनी निर्दयी हो गई ? मौन धारण तो मोदी जी ने नोटबंदी के समय भी किया था, लोगों की मरने की खबरें जगह-जगह से आती रही, पर प्रधानसेवक जी ठस से मस नहीं हुए । लोग मरते रहे प्रधानसेवक जी विदेश यात्रा पर निकल पडे़ थे । इनकी अनुपस्थिति में मोदी भक्तों ने मोर्चा संभल लिया था । कोई चूं-चूपड़ किया कि उसकी जबान खींचकर बाहर निकाल देते थे । आज भी कोरोना की इस महामारी में ऐसा ही कुछ चल रहा है। परन्तु इस बार का हालात कुछ बदले हुए हैं । गरीबों के लिए घड़ियाली आंसू बहाने वाले प्रधानसेवक की चुप्पी ने भक्तों को भी झकझोर तो दिया ही है, आखिर मानवीयता भी कुछ होती है। 

मौन धारण तो मोदी जी ने नोटबंदी के समय भी किया था, लोगों की मरने की खबरें जगह-जगह से आती रही, पर प्रधानसेवक जी ठस से मस नहीं हुए । लोग मरते रहे प्रधानसेवक जी विदेश यात्रा पर निकल पडे़ थे । इनकी अनुपस्थिति में मोदी भक्तों ने मोर्चा संभल लिया था । कोई चूं-चूपड़ किया कि उसकी जबान खींचकर बाहर निकाल देते थे । आज भी कोरोना की इस महामारी में ऐसा ही कुछ चल रहा है। परन्तु इस बार का हालात कुछ बदले हुए हैं । गरीबों के लिए घड़ियाली आंसू बहाने वाले प्रधानसेवक की चुप्पी ने भक्तों को भी झकझोर तो दिया ही है, आखिर मानवीयता भी कुछ होती है। 

अब बात इस बीस लाख करोड़ की हम कर लेते हैं । प्रधानमंत्री जी के आज छठवाँ साल पूरा हो चुका । आपने पंचतंत्र की एक कहानी ‘‘ग्वालिन का सपना’’ जरूर पढ़ा होगा । एक ग्वालिन थी, वह दूध बेचने जा रही थी । उसके सर पर दूध से भरा घड़ा था । चलते-चलते वह मन ही मन विचार कर रही थी, दूध को बेचने से जो पैसे मिलेंगे, उन पैसो से वह अंडे खरीदेगी,  अंडों से मुर्गी के बच्चे होगें तो वह उससे दो से चार, चार से चौदह, चौदह से चौसठ बच्चे करेगी । फिर वह उससे एक बड़ा फर्म हाउस खोल लेगी और एक दिन वह धनवान बन जायेगी, तभी सामने से एक गाड़ी उससे टकरा जाती है, उसका दूध सड़क पर बिखर जाता है । 

कहानी पढ़ते ही एक भक्त चिल्ला पढ़ा इसमें प्रधानमंत्री जी क्या दोष? ट्रेन की पटरियों पर कोई सोएगा तो मरेगा ही न । रास्ते पर चलेगा तो मरेगा ही न । मोदी ने ट्रेन चला दी फिर ये पैदल क्यों ? सही बात है अब इनको गुजरात या महाराष्ट्र वापस जाना होगा ट्रेन पकड़ने क्या यही न कहना चाहतें हैं आप? तो क्या रास्ते में इनके लिए हेलीकाप्टर भेजे? तो किसी ने लिखा कि नहीं हेलीकाप्टर तो फूलों को बरसाने के लिए है ।

कहानी पढ़ते ही एक भक्त चिल्ला पढ़ा इसमें प्रधानमंत्री जी क्या दोष? ट्रेन की पटरियों पर कोई सोएगा तो मरेगा ही न । रास्ते पर चलेगा तो मरेगा ही न । मोदी ने ट्रेन चला दी फिर ये पैदल क्यों ? सही बात है अब इनको गुजरात या महाराष्ट्र वापस जाना होगा ट्रेन पकड़ने क्या यही न कहना चाहतें हैं आप? तो क्या रास्ते में इनके लिए हेलीकाप्टर भेजे? तो किसी ने लिखा कि नहीं हेलीकाप्टर तो फूलों को बरसाने के लिए है । गांव में जब बाढ़ आ जाती है तो गांव वाले सबसे पहले ‘ढिबरी’ और माचिश साथ रख लेते हैं ताकि रात के अंधेरे में वह संदेश भेजने के काम आ सके । आप कभी सोच भी नहीं पाओगे कि ‘अंधेरा’ भी लोगों की रक्षा करता है। परन्तु देश के प्रधानमंत्री जी की आंखें इस कदर चौंधिया गई है कि दिन के उजाले में भी कुछ नहीं दिखाई दे रहा इनको।

 गांव में जब बाढ़ आ जाती है तो गांव वाले सबसे पहले ‘ढिबरी’ और माचिश साथ रख लेते हैं ताकि रात के अंधेरे में वह संदेश भेजने के काम आ सके । आप कभी सोच भी नहीं पाओगे कि ‘अंधेरा’ भी लोगों की रक्षा करता है। परन्तु देश के प्रधानमंत्री जी की आंखें इस कदर चौंधिया गई है कि दिन के उजाले में भी कुछ नहीं दिखाई दे रहा इनको।

आज कुछ ऐसा ही सपना प्रधानमंत्रीजी मोदीजी ने देश की जनता को दिखाया है। चार दिनों भारत के वित्त मंत्री जी इस सपने की किस्त जनता को परोस रही है । चार दिनों की प्रेस ब्रिफिंग से अब तक पल्ले सिर्फ इतना ही लगा कि बैंकों से लोगों को कर्ज मिलेगा। भारत का दो सो लाख करोड़ का बजट चार घंटे में समाप्त हो जाता है पर प्रधानमंत्री जी के द्वारा की गई बीस लाख करोड़ की जिसमें से सत्तर प्रतिशत पुरानी घोषणा को मिला दिया गया था, को जनता को समझाने में इनको चार दिन लग गया। 


कोरोना की महामारी से बचाव के लिए इन दो महीनों में कोई घोषणा नहीं की, सिवा लाॅकडाउन के, थाली पिटवाने, दीया जलवाने या गरीबों के सर पर फूलों की बरसात करवाने के यदि कोई महत्वपूर्ण कार्य किया है तो वह रेल के हजारों डब्बों को कोरोना अस्पतालों में तबदील करवा दिया गया । यह काम स्कूल-विद्यालयों में भी किया जा सकता था । अब वे डब्बों में कैसे कोरोना अस्पताल चलेगा यह भी सोचने की बात है?


कोरोना की महामारी से बचाव के लिए इन दो महीनों में कोई घोषणा नहीं की, सिवा लाॅकडाउन के, थाली पिटवाने, दीया जलवाने या गरीबों के सर पर फूलों की बरसात करवाने के यदि कोई महत्वपूर्ण कार्य किया है तो वह रेल के हजारों डब्बों को कोरोना अस्पतालों में तबदील करवा दिया गया । यह काम स्कूल-विद्यालयों में भी किया जा सकता था । अब वे डब्बों में कैसे कोरोना अस्पताल चलेगा यह भी सोचने की बात है?

मित्रों ! आपने गुब्बारे वाले को जरूर देखा होगा । वह गुब्बारे बेचता है और जो नहीं बिकता उसे हवा में उड़ा देता है। बीस लाख करोड़ का गुब्बारा इन मजदूरों के लिए बस आकाश में उड़ते बैलून की तरह ही है। मजदूरों के दर्द को दरकिनार कर, हम आत्मनिर्भता की बात कर रहें हैं । ऐसी आत्मनिर्भरता का परिणाम तो बीस सालों में भी नहीं आयेगा। हाँ ! इतना जरूर है कि इन लोगों की मानसिकता से देश के मजदूरों के आत्मसम्मान को ठेस लगी है उसका परिणाम घातक ही होगा।  ‘‘एको अहं, द्वितीयो नास्ति, न भूतो न भविष्यति’’ । यह अंहकार देश को ले डूबेगा । जयहिन्द !

मंगलवार, 28 अप्रैल 2020

गृहमंत्री जी का दर्द झलका


‘‘मैं कोरोना संक्रमण से लड़ रहे सीआरपीएफ के बहादुर सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इकराम हुसैन के निधन की सूचना से अत्यंत दुःखी हूँ । वह अंत समय तक कोरोना महामारी से पूरी वीरता से लड़े । देश की सेवा व आंतरिक सुरक्षा के लिए उनका योगदान हम सभी देशवासियों को प्रेरित करता है ।’’ - सौन-पुरुष गृहमंत्री जी श्री मान अमित शाह 
कोलकाता : 29/04/2020, अमेरिका के एक अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अपनी सालाना वार्षिक रिपोर्ट [2020] में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों के ऊपर बढ़ते हमले के तहत के लिए सीधे-सीधे वर्तमान भाजपा की सरकार को कठघरें में खड़ा कर दिया है । रिपोर्ट में कहा गया है कि

  “The national government allowed violence against minorities and their houses of worship to continue with impunity, and also engaged in and tolerated hate speech and incitement to violence.” 

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के पश्चात सत्ताधारी सरकार, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की अनुमति और नफरत भरे भाषण और हिंसा के लिए हिन्दुओं को उकसाने जैसे कृत्य में सम्मिलित है । रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने दोबारा सत्ता में आते ही नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) लागू कर दिया एवं इस संशोधन में (CAA) - अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से गैर-मुस्लिम प्रवासियों के लिए नागरिकता भारत में नागरिकता का प्रवाधान कर दिया । कई भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानों को ‘‘ जय श्री राम ’’ बोलने के लिए बाध्य किया जा रहा है नहीं बोलने पर उनकी हत्या कर दी जाती है । 

 “ BJP-ruled states, Lynch mobs often took on overtly Hindu nationalist tones. In June, in Jharkand, a mob attacked a Muslim, Tabrez Ansari, forcing him to chant “Jai Shri Ram (Hail Lord Ram)” as they beat him to death.” 

2019 में सत्ता में आने के बाद से लगातार सरकार मुसलमानों को तारगेट कर रही है । इस रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर जिसे मुस्लिम बाहुल राज्य का दर्जा देते हुए लिखा है कि सरकार ने इसके विशेष प्रावधान को हटाकर उनके धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रहार किया है।

“ In August, the government also revoked the autonomy of Muslim-majority state Jammu and Kashmir and imposed restrictions that negatively impacted religious freedom.” 

साथ ही भाजपा शासित राज्यों में गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों पर मोब लिंचिंग की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है ।

इस रिपोर्ट में बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, अल्पसंख्यकों पर लगातार हमला आदि विषय को भी उठाया गया है । इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि देश में हो रही मोब लिंचिंग की कई घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया व साथ ही भारत के गृहमंत्री अमित  शाह ने उल्टे कहा कि वर्तमान कानून में कोई संशोधन की जरूरत नहीं है, साथ ही उसने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से मोब लिंचिंग के सारे डाटा भी हटवा दिये।

  “ In 2018, the Supreme Court urged the central and state governments to combat lynchings with stricter laws. When, by July 2019, the central government and 10 states had failed to take appropriate action, the Supreme Court again directed them to do so. Rather than comply, Home Minister Shah called existing laws sufficient and denied lynchings had increased, while the Home  Ministry instructed the National Crime Records Bureau to omit lynchings from the 2019 crime data report.” 

इस रिपोर्ट में दिल्ली में पिछले फरवरी माह में जब अमेरिका के राष्ट्रपति भारत की यात्रा में थे ठीक उसी समय दिल्ली में लगातार तीन दिनों तक दिल्ली के मुस्लिम इलाकों में मुसलमानों के घरों को जलाया गया और उनको मारा गया जो दिल्ली पुलिस के रिपोर्ट के अनुसार वह गृह मंत्रणालय के अधीन कार्य कर रही थी । भले ही इस रिपोर्ट को भारत सरकार ने सिरे से इंकार कर दिया हो पर सच तो यही है कि भारत के गृहमंत्री श्री अमित शाह  इस सभी घटनाओं के ईर्द-गिर्द घूमते नजर आते हैं ।

आज देश कोरोनावायरस की महामारी से जूझ रहा है । दिनांक 29 अप्रैल तक भारत में अब तक कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या तीस हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है । इसमें अब तक मरने वालों की संख्या 937 बताई गई है । देशभर में लोगों की एक राय है कि ऐसे समय में जब हम दुनिया की इस महामारी से लड़ रहें हैं कम से कम इस समय तो हमें हिन्दू-मुस्लिम करने से परहेज करना चाहिये ।

भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा व आर.एस.एस प्रमुख मोहन भागवत ने भी सामने आकर कह दिया कि हमें किसी भी प्रकार का धार्मिक भेदभाव नहीं करना चाहिए । परन्तु पिछले एक माह के लाॅकडाउन के दौरान भारत के गृहमंत्री पूरी घटना से परोक्ष रूप से नदारद दिखे । शायद वे किसी धर्म विशेष के अभियान में व्यस्त रहे होंगे। कोई बात नहीं आज भारत के नये सौन-पुरुष गृहमंत्री जी श्री मान अमित शाह का दर्द झलक ही गया वे वे अपने ट्विटर हैंडल पर लिखते हैं ‘‘मैं कोरोना संक्रमण से लड़ रहे सीआरपीएफ के बहादुर सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इकराम हुसैन के निधन की सूचना से अत्यंत दुःखी हूँ । वह अंत समय तक कोरोना महामारी से पूरी वीरता से लड़े । देश की सेवा व आंतरिक सुरक्षा के लिए उनका योगदान हम सभी देशवासियों को प्रेरित करता है ।’’ अब देश के राष्ट्रवादी तथाकथित हिन्दुओं की रक्षा करने वाली सेना किस प्रकार भारत के गृहमंत्री को जबाब देती है यह भी हमें देखना है। - शंभु चौधरी, कोलकाता ।

‘‘कोरोना संकट व नमस्ते ट्रंप’’ शंभु चौधरी

डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले 24-25 फरवरी को भारत की यात्रा की थी । जिसमें लाखों लोगों को एक साथ बैठाया गया था। इसके पूर्व ही देश में तब तक कोरोना महामारी को लेकर सतर्कता जारी हो चुकी थी । विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना की महामारी से विश्व को सतर्क कर दिया था । भारत सरकार ने भी चीन से आने वालों को सतर्क कर दिया था । आज गुजरात में हर तरफ ‘‘नमस्ते ट्रंप’’ की चर्चा जोरों पर है । चीन के वुहान शहर को याद किया जा रहा है। सबको लगता है कि कहीं अहमदाबाद वुहान न बन जाए?
महाराष्ट्र में कोरोना: भारत में महाराष्ट्र को आर्थिक राजधानी के रूप में जाना-पहचाना जाता है । भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुंबई, महाराष्ट्र की राजधानी है । महाराष्ट्र की गिनती भारत के सबसे धनी एवं समृद्ध राज्यों में की जाती है।  आज महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमित लोगों का आंकड़ा 8590 पहुंच गया है। कल सोमवार दिनांक 27 अप्रैल को महाराष्ट्र में कोरोना के 522 नए मामले सामने आये। चार्ट देखें।  पूरे महाराष्ट्र को छह मंडलों में विभाजित किया गया है। जिसमें कोकण मंडल में सात जिले आते हैं - मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, रायगढ़, ठाणे, पालघर रत्नागिरी एवं सिंधुदूर्ग । नासिक मंडल में नासिक, धुले, नंदूरबार, जलगाव एवं अहमदनगर । पुणे मंडल में पुणे, सातारा, सांगली, सोलापूर एव कोंल्हापूर । औरंगाबाद मंडल में औरंगाबाद, जालना, परभणी, हिंगोली, बीड, नांदेड, उस्मानाबाद एवं लातूर । अमरावती मंडल में अमरावती, बुलढाणा, अकोला, वाशिम एवं यवतमाळ । नागपूर मंडल में नागपूर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपूर एवं गडचिरोली । यानी कि कुल छह मंडलों को 36 जिलों में बांटा गया है। जिसमें सबसे अधिक कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 5776 एवं मृत्यु 219  मुंबई शहर ‘मनपा’ से आते हैं जो कई सवाल खड़े कर देता है । जिस जगह तमाम शासन तंत्र, चिकित्सा के सभी सुख-सुविधाएं उपलब्ध है उसी जगह सबसे अधिक मामले शोचनीय है । वहीं आज अचानक से दिल्ली को पीछे छोड़ते हुए गुजरात का अहमदाबाद शहर रेड जोन में बदल चुका है। यानी कि इस शहर में पानी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगा है।

गुजरात में कोरोना: गुजरात पश्चिमी भारत में स्थित एक राज्य है। इसकी उत्तरी-पश्चिमी सीमा जो अन्तर्राष्ट्रीय सीमा भी है, पाकिस्तान से लगी है। राजस्थान और मध्य प्रदेश इसके क्रमशः उत्तर एवं उत्तर-पूर्व में स्थित राज्य हैं। महाराष्ट्र इसके दक्षिण में है। अरब सागर इसकी पश्चिमी-दक्षिणी सीमा बनाता है। इसकी दक्षिणी सीमा पर दादर एवं नगर-हवेली हैं। (*विकिपीडिया) पिछले बीस-बाईस सालों से यहाँ भारतीय जनता पार्टी की सरकार है । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी पंद्रह सालों तक यहां के मुख्यमंत्री बने रहे । उन्होंने भारत को गुजरात मॉडल की परिकल्पना दिखा कर केन्द्र की सत्ता में प्रधानमंत्री बने । आज जब इस कोरोना महामारी की बात आई तो वहाँ के अस्पतालों में लगी लंबी कतार और चिकित्सा के नाम पर जनता की हाहाकर दिल्ली के कानो तक भी नहीं पंहुच पा रही । शायद इस लिए भी कि गुजरात माॅडल की हवा निकल जाएगी। वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपानी हैं। 
इनके वेबसाइट पर एक नजर दौड़ाने पर पता चला कि "Major Initiative" कालम में ई-गोवर्नस, शिक्षा, कृषि, महिला व बाल विकास, ग्लोबल वार्निंग एवं इंफ्रास्टैक्चर की बात तो है पर स्वास्थ्य व चिकित्सा की कोई योजना इनके मानस में नहीं दिखी। जिसे गुजरात मॉडल का नमूना माना जा सकता है । खोजते-खोजते इनके जब https://gujcovid19.gujarat.gov.in/  उक्त वेबसाइट पर गया तो पता चला कि कोरोना संक्रमित लोगों के 3548 में से 2378 संक्रमित लोग एवं मृत्यु 109 (162 Total Death) में सिर्फ अहमदाबाद से ही है। सूरत में 556 संक्रमित लोगों  में  (19 Death) और बोडौदा में 240 संक्रमित लोगों  में  (13 Death) मामले सामने आये हैं ।

आज गुजरात में हर तरफ ‘‘नमस्ते ट्रंप’’ की चर्चा जोरों पर है ।
आपको याद होगा इसी  कोरोना महामारी के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले 24-25 फरवरी को भारत की यात्रा पर आये थे और उनके साथ आयी थी उनकी विशाल टीम जो कई दिनों तक अहमदाबाद की सुरक्षा की जांच कर रही थी।  इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान ट्रंप ने आगरा का ताज महल, नयी दिल्ली और अहमदाबाद  की यात्रा की थी।  अहमदाबाद के विशाल क्रिकेट स्टेडियम को राष्ट्रपति ट्रंप के स्वागत हेतु तैयार किया गया था । इसी अहमदबाद शहर में 700 करोड़ रुपये की लागत गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (जीसीए) के स्वामित्व वाले पुराने सरदार पटेल स्टेडियम को पूरी तरह तोड़कर नया बनाया गया ।  आज कोरोना की महामारी से पूरा अहमदाबाद कांप चुका है ।  सब कोई डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा को याद कर रहे हैं।  जिसमें लाखों लोगों को एक साथ बैठाया गया था। इसके पूर्व ही देश में तब तक महामारी को लेकर सतर्कता जारी हो चुकी थी । विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना की महामारी से विश्व को सतर्क कर दिया था । भारत सरकार ने भी चीन से आने वालों को सतर्क कर दिया था । आज गुजरात में हर तरफ ‘‘नमस्ते ट्रंप’’ की चर्चा जोरों पर है । चीन के वुहान शहर को याद किया जा रहा है। सबको लगता है कि कहीं अहमदाबाद वुहान न बन जाए?

मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

व्यंग्य: पत्नी देवो भव

....शंभु चौधरी, कोलकाता ।

पत्नी ने फिर एक ताना कसा - ‘‘ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप का नाम तो सुने होंगे ? उनकी सारी हेकड़ी इस कोरोना ने निकाल के उसके हाथ में थमा दी ‘‘लो गिनो लाशों को बैठे-बैठे’’ । तुमको तो मसल के बिना नमक-तेल लगाये कच्चा निगल जायेगा यह चीनी  कोरोना ।
21, April'2020, कोलकाता (भारत):
एक कहावत है- ”लॉकडाउन के लड्डू जो खाये पछताये, जो ना खाये वो भी पछताये“ रामप्रसाद जी लॉकडाउन में पिछले एक माह से घर में ही खुद की पत्नी के द्वारा क्वारंटाइन हो रखे हैं । अब तो पत्नी ने अखबार लेना बंद कर दिया, पता नहीं कोरोना किस रास्ते से घर में प्रवेश कर जाए, परन्तु जब राशन-पानी की बात आती तो सबसे पहले पत्नी फेरीवाले को बाहर आवाज देती सुनाई देती ।

एऐ भाई - ‘‘ परवल है?, नींबू है?
सब्जी वाला - हाँ! परवल चालीस रुपये किलो, नींबू दस के तीन । वह जबाब देता ।
कभी ऑनलाइन राशन नहीं मंगाया पर इस लॉकडाउन ने मुझे ऑनलाइन राशन भी खरीदना सीखा दिया था ।
दिनभर कभी मोबाइल में, कभी टीवी पर समाचार देखता रहता, सारा दिन बस कुछ लिखने में, कुछ पढ़ने में गुजर जाता ।
लॉकडाउन के चलते पिछले कई दिनों से काम पर मासी भी नहीं आ रही है सो घर के सारे काम में भी सहयोग करना पड़ता ही ।

झाडू-पौंछा, बर्तन सफाई, अब तो रोटी बेलना भी सीखा दिया था पत्नी ने ।
शादी के 35 साल गुजर गये, जितना रौब मैंने इन 35  सालों में नहीं दिखाया था इन एक माह के लॉकडाउन में पत्नी ने दिखा दिया । जो-जो काम कभी सोचा नहीं था सब सीखा दिया ।
आप मेरी इस विवशता का कृपया मजाक में ना लें यह हकीकत है जो बयाने दिले सुना रहा हूँ । अब कल की ही बात लें । मैं सोचा की नाश्ते में कुछ बना लिया जाय, सो पत्नी को पूछा - ‘‘कुछ लड्डू तल लें ?’’

मेरा सवाल के शब्दों की विवषता देखिये वह हँसने लगी । बड़े साहित्यकार बनते हो ! इतना भी बोलना नहीं आता लड्डू तले नहीं, बनाये जाते हैं। उसने पलट के जबाब दिया ।
तब मुझे ख्याल आया कि आज तक तो लड्डू खाये ही खाये थे, अब घर में बैठा-बैठा कर भी क्या सकता था? मन ही मन आत्मग्लानि से भर चुका था । आज तक पत्रकारिता में घूल ही फांकी थी ? तभी मुझे पाठ्यक्रम की याद आ गई कि जिस क्षेत्र में पत्रकारिता करनी हो उस क्षेत्र की भाषा, तकनीकी शब्दों का अर्थ, उसके प्रयोग की जानकारी जरूरी है । ऐसा न हो कि बाँग्ला में एक वाक्य है - ‘जोल खाबे ?’ अब इसको यह लिख दिया जाए कि पानी खाने को पूछा । तो हिन्दी के पाठक हमें मारने दौड़ेंगे ठीक वही हालात मेरी आज मेरे ही घर में हो रही थी।
इस कोरोना ने मुझे इस कदर लाचार बना दिया था कि अपना डर भी नहीं दिखा पा रहा था ।

एक दिन धौंस दिखाते हुए बोल ही दिया कि - ‘‘ तुम आजकल कुछ ज्यादा ही बोल रही हो ।’’ मैं काम पर चला जाऊँगा ।
उसने भी पलट के जबाब दे दिया वह रास्ता खुला है । किसी ने रास्ता बंद नहीं किया । हाँ ! सुनो घर में मत आना जब तक लॉकडाउन है । दो माह का राशन घर में है उसके बाद की, बाद में सोचेगें ।
मेरी तो बोलती ही मानो बंद ।

सारा धौंस एक सेकेण्ड में कपूर की तरह उड़ गया । चुप-चाप पलंग पर लेट गया और हाथ में मोबाइल लेकर अपना ध्यान दूसरी तरफ करने लगा ।
अरे यह क्या भारत में तो कल कोरोना के बारह हजार मामले थे आज पंद्रह हजार हो गए ? भीतर ही भीतर मरने वालों की संख्या की तरफ ध्यान देता हूँ । रूह कंपकपाने लगी । गला सुखने लगा । पानी का ग्लास हाथ में लिया और एक घुंट पानी पी कर आँखे बंद कर ली । तभी-

पत्नी ने फिर एक ताना कसा - ‘‘ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप का नाम तो सुने होंगे ? उनकी सारी हेकड़ी इस कोरोना ने निकाल के उसके हाथ में थमा दी ‘‘लो गिनो लाशों को बैठे-बैठे’’ ।
फिर कुछ रूक कर- "तुमको तो मसल के बिना नमक-तेल लगाये कच्चा निगल जायेगा यह चीनी  कोरोना ।"
वैसे भी सुनी हूँ कि चीनी लोग खाने के बड़े शौकीन होते हैं । सांप, छछूंदर, चमगादड़, कुत्ते, बिलार, चूहा यहाँ तक की तेलचटा, केकड़ा सब हजम कर जाते हैं।  तुम तो इसे देखकर ही डर जाते हो । इस कोरोना से बचना है तो चुप से घर में पड़े रहो । मेरी बात मानो तो अच्छा ना मानो तो भी अच्छा । हमें तो लाश भी नहीं देगी सरकार देखने । बाहर जाना है तो फोटो फ्रेम बनवाते जाओ ।
अब तक मेरे दिमाग ठिकाने पर आ चुके थे । सारी इंद्रियाँ चुस्त-दुरुस्त हो गई थी। लॉकडाउन के लड्डू कितने महँगे है समझ में आ चुका था। भाई ! मेरी सलाह मान लो आज ‘‘पत्नी देवो भव’’  का मंत्र ही हमारी रक्षा का एक मात्र सूत्र है । बस । आगे कुछ भी मत सोचो ।

रविवार, 19 अप्रैल 2020

कोविड-19 या हिन्दू-मुस्लिम ?

....शंभु चौधरी, कोलकाता ।

        19 अप्रैल 2020, कोलकाता (भारत): भारत के प्रधानमंत्री ने आज बहुत अच्छी बात कही कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए सभी संप्रदाय के लोग एकजुट हो । ‘‘कोविड-19 जो किसी जाति, धर्म, रंग, पंथ, भाषा या सीमाओं को नहीं देखता। हमें एकता और भाईचारे को प्रधानता प्रदान करनी चाहिए।’’ साथ ही अंत में एक द्विअर्थी पंक्ति भी जोड़ दी।  "We are in this together : PM"  इसका अर्थ तो प्रधानमंत्री जी ही समझा सकते हैं कि उनके दिमाग में क्या चल रहा था इन शब्दों का चयन करते समय ? आम साधारण भाषा में तो इसका अर्थ यही लगाया जा सकता है। क्या सिर्फ कोरोना को लेकर ही हम एक हों बाकी विषय पर नहीं?

       
सब्जीवालों को भगवा झंडा लगा कर सब्जी बेचते
आजकल देश में एक साथ दो प्रकार की लड़ाई चल रही है पहली तो ‘कोविड-19’’ की लड़ाई तेजी से रफ्तार लेने लगी है। आजतक देश में कुल सोलह हजार से भी अधिक मामले सामने आ चुके हैं जैसे-जैसे जांच की रफ्तार तेज होगी इनकी संख्या एक लाख से भी ऊपर जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जिसमें अब तक 519 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। राहत कि बात इतनी ही है कि इनमें स्वस्थ हो कर घर वापस लौटने वालों की संख्या 2310 है। जांच की रफ्तार जितनी मंद गति से चलेगी उतनी ही तेज गति से कोरोना भारत के गांव व कस्बों को अपनी चपेट में ले लेगा। बिहार जैसे राज्य जहाँ बाढ़ के पानी के आने का हर साल इंतजार रहता है अभी तक नीतीश कुमार जी की सरकार तिनके से घोड़े को घास खिला रहे हैं वहीं बंगाल, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र की सरकारों के तले से जमीन सरकती नजर आ रही है। दरअसल इन राज्य के नेताओं को कोरोना का रोना सिर्फ दिखावा लगता है। ऐसे राज्यों को सेना के हवाले कर देना चाहिये जिन-जिन राज्यों के मुख्यमंत्री असक्षम हो या जिनके पकड़ में नहीं है।
        
        देश में इन दिनों कोरोना की महामारी के बीच हिन्दू-मुस्लिम की महामारी भी तेजी से फैल चुकी है। घर-घर में इस बात को लेकर तनाव पैदा कर दिया गया है अब सब्जीवालों को भगवा झंडा लगा कर सब्जी बेचते आसानी से देखा जा सकता है। यह प्रधानमंत्री जी के उक्त बयान की भी पुष्टि करता है कि जहर किस कदर समाज में फैलाया गया है। चित्र देखें।

        आये दिन कभी किसी गैर भाजपाई राजनेताओं के नाम से अफवाहें फैलाना तो कभी पुराने वीडियों को नये ठंग से सांप्रदायिक जमा पहनाना मानो भारत सरकार से इनको अफवाहों को फैलाने का लाइसेंस मिल चुका है।। धडल्ले से आप इनको फेसबुक या ट्विटर पर पोस्ट करते देखें जा सकते है। 

        शुक्रवार [17.04.2020] की ही एक घटना है गत शुक्रवार को महाराष्ट्र के पालघर गांव के कासा पुलिस थाने के अन्र्तगत एक घटना घटी । स्थानीय कलेक्टर कैलास शिंदे के अनुसार, सुशील गिरि महाराज (35), चिकेन महाराज (70) और ड्राइवर नीलेश तेलगड़े (30) अपने किसी व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए महाराष्ट्र से सूरत (गुजरात) जा रहे थे, लॉकडाउन की वजह से ये लोग गांव के रास्ते को चुन लिये थे ताकि रास्ते में कोई व्यवधान उत्पन्न ना हो जाए ।
इस घटना हिन्दू-मुस्लिम समझा जाय चुकि मरने वाले साधु-संत के वेश में थे ?
जब ये लोग पालघर गांव के एक ग्रामीण कस्बा गडचांचल से निकल रहे थे रात के लगभग 10 बजे उन्हें गांववालों ने पकड़ लिया । यह कस्बा आदिवासी बाहुल इलाका माना जाता है। मौके पर पुलिस भी पहुच चुकी थी ।  लॉकडाउन के मद्देनजर, पालघर जिले के ग्रामीण आदिवासी इलाकों में कई तरह की अफवाह फैल रही थी, जिसमें कुछ असामाजिक तत्व चोर, लुटेरे और अपहरणकर्ता वेश बदल कर गांव में आ सकते हैं बच्चों के चोरी की अफवाह उसमें से एक थी। आदीवासी ग्रामीणों ने इन तीनों पर संदेह के आधार पर धर दबोचा और पुलिस के सामने ही उन तीनों की सैकड़ों गांव वालों ने मिलकर उनकी हत्या कर दी। आरोपियों के खिलाफ कासा पुलिस स्टेशन में धारा  302, 120 (E) 427, 147, 148, 149/307, 353, 333, 323, 341 के तहत कुल तीन मामले दर्ज किए गए हैं। 110 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनमें से नौ 18 वर्ष से कम उम्र के हैं । यहां यह सोचने कि बात है कि सर्वप्रथम इस घटना हिन्दू-मुस्लिम समझा जाय चुकि मरने वाले साधु-संत के वेश में थे ? कि इसे साधारण मोबलांचिंग । दूसरा सबसे बड़ा सवाल यह भी उठता है कि घटनास्थल के वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वह साधु जिसकी उम्र लगभग 60-70 दिखती है बार-बार पुलिस को पकड़ कर खुद को बचाने की गुहार लगाता है। और घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी बार-बार हट रहा है उससे खुद को अलग कर रहा है । इससे दो बात तो साफ हो जाती है कि मारनेवाले यदि एक बार हम मान भी ले कि सबके सब मुसलमान हैं जैसा कि अंधभक्त दावा कर रहें हैं। तो क्या महाराष्ट्र की पुलिस जो उस समय घटनास्थल पर दिख रही है वह भी मुसलमान ही थी क्या? जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है भारत सरकार उन लोगों का धर्म भी उजागर करे ताकि इस तरह की अफवाहों को विराम लगाया जा सके। -जयहिन्द।