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मंगलवार, 14 अगस्त 2012

संसद की पवित्रता - शम्भु चौधरी

66वें स्वतंत्रता दिवस के पूर्व संध्या परः

66वें स्वतंत्रता दिवस के पूर्व संध्या पर देश के 13वें राष्ट्रपति महामहिम श्री प्रणव मुखर्जी ने देश के नाम अपने संदेश में कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर प्रहार होने से देश में अव्यवस्था फैल जाएगी। आपने स्वीकार किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का आंदोलन जायज है। जहां एक तरफ आपने विधायिका के महत्व को समझाने का प्रयास किया वहीं दूसरी तरफ आपने जनता के आक्रोश को भी जायज ठहराते हुए संसद को ही नसीहत दे डाली कि कभी-कभी जनता अपना धैर्य खो देती है पर इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर प्रहार का बहाना नहीं बनाया जा सकता। उपरोक्त संदेश कई तरह से उलझाव पैदा करने वाला है कि महामहिम जी किसे यह बताना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार के लिए कौन जिम्मेदार है। संसद का कतरा-कतरा भ्रष्टाचार के बलि चढ़ चुका है। प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी एक हाथ में अपने खुद के ईमानदार होने का प्रमाण पत्र लिए, देश को गठबंधन धर्म की मजबूरी बताते नहीं थकते। मानो हमने यह स्वीकार कर लिया है कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था इतनी लचर और लाचार हो चुकी है कि चोरों को चुनना ही लोकतंत्र का लक्ष्य रह जाता है। जो लोग इस लोकतंत्र के रक्षक बन अपनी आहुति दें वे चोर और जो चुनकर या पिछले दरवाजे से संसद में पंहुच जाए वे सभी ईमानदार और लोकतंत्र के रक्षक एवं विधायिका के निर्माता बन जाते हैं। संभवतः लोकतंत्र की इसी परिभाषा को अपने संदेश के माध्यम से चिन्हीत करना चाहते हैं हमारे राष्ट्रपति महामहिम श्री प्रणव मुखर्जी जी।

पिछले दिनों श्री अण्णा हजारे व उनकी टीम ने रामलीला मैदान में अपना दम तौड़ दिया। कल बाबा रामदेव व उनकी टीम भी दम तौड़ती नजर आई। प्रश्न यह नहीं है कि किसने बाजी मारी या किसने हारी। प्रश्न यह है कि संसद इतने संवेदनशील मामले पर चुप क्यों? संसद के अन्दर चुनकर गये और खुद को चुनावा कर गये नेताओं की लम्बी कतार देश को गुमराह क्यों कर रही है? आश्चर्य की बात है कि लोकतंत्र के प्रहरी संसद के अन्दर 543 सांसद जो जनता के सीधे प्रतिनिधि होते हैं और 245 सांसद जो पिछले दरवाजे से देश के कर्णधार बनकर संसद में पंहुचते है। इन सब ईमानदार और देशभक्तों को आखिर उस समय सांप क्यों सूंध जाता है जब भ्रष्टाचार और काले धन की बात सामने आती है? संसद की गरिमा और इसकी मर्यादा की रक्षा करने वाले ये चुने हुए सांसदों पर जब जनता द्वारा विचारों का हमला होता है तो वे संसद और संसदों की गरिमा की की दुहाई देते नहीं थकते। वहीं जब यही सांसद जनता पर तीखे व्यंग्य करते हैं तो जैसे ‘हम भी रोजा कर रहें हैं। या रामलीला तो हर साल हाती है।’’ जैसी अपमानजनक टिप्पणी करते नहीं थकते तो उस समय इनको अपनी ईमानदारी और संसद की मर्यादा का ख्याल क्यों नहीं आता। वहीं जब कुछ सांसदों पर कोई आक्षेप आता है या इनको चोर-बेईमान कहा जाता है तो इनको संसद की पवित्रता का आभास होने लगता है। संसद लोकतंत्र का पवित्र मंदिर जरूर है पर इसमें बैठे लोगों की मंशा ने इसकी पवित्रता को हर तरह से अपवित्र करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। पता नहीं इनकी देश भक्ति व इनका स्वाभिमान भी उस समय कहां चरने चला जाता है जब चंद लोगों के चलते पूरी संसद अपवित्र नजर आने लगती है?

शम्भु चौधरी
सचिव, राजनैतिक चेतना मंच

रविवार, 14 अगस्त 2011

व्यंग्यः लाल किले से प्रधानमंत्री का भाषण

15 अगस्त 2011: लाल किले से भारत के भ्रष्टतम प्रधानमंत्री श्री डा.मनमोहन सिंह जी के भाषण की मूल प्रति आज ही हम देश कि जनता के सामने जारी करने जा रहें हैं।




देश की धर्मनिरपेक्षता पर भी हमला होने वाला है। लोकतंत्र खतरे में दिखाई दे रहा है। संसद की मर्याद को भी ताख पर रखा जा रहा है। देश में संविधान को भी जलाया जा रहा है जो हमारे देश के गाण्तंत्र के लिए एक चुनौती बनती जा रही है। हमारी बेइमानी पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया जा रहा है। हमने चार मंत्रियों को जेल भेज दिया फिर भी हमपर विश्वास नहीं किया जा रहा है।


मेरे देशवसियों,
सोनिया जी! आप सभी जैसा कि जानते हैं कि इस आजादी को हमने बड़ी मुश्किल से प्राप्त की है कितनी मुश्किलों से हमारे देश में चुनाव होते हैं। चुनाव के समय सारा जमा कालाधन आपलोगों के बीच ही वितरित कर दिया जाता है। फिर इस धन को जमा करने के लिए हमें वापस भ्रष्टाचार का सहारा लेना पड़ता है। अब सोनिया जी.... सोनिया जी.. मैं क्या कह रहा था.... ऐं... सोनिया जी...... हाँ! देश की सेवा करना है तो सबको सोनिया जी की सेवा करनी ही चाहिये ये भारत की माता से भी बढ़कर है। अभी-अभी उसका किसी गुप्त जगह में आपरेशन हुआ है यह गठबंधन धर्म की मजबूरी है। मेरी लाचारी भी है कि मैं डाक्टर होते हुए भी उनकी बीमारी का इलाज नहीं कर सका मुझे डूब मरना चाहिये था परन्तु अभी तक मैडम ने मुझे डूब मरने के लिए नहीं कहा है। सबकी सब बीमार आजकल लाइलाज हो चुकी है। देश की कानून व्यवस्था से लेकर अर्थ व्यवस्था तक नक्सलवाद से लेकर अन्ना की ब्लैकमेलिंग तक। संसद से लेकर विधानसभओं तक। सब अपनी मनमानी करने में लगे हैं। अब सोनिया जी ने भी हमें कुछ नहीं बताया नहीं तो कम से कम हम उनको एयरपोर्ट तक तो छोड़ने जा ही सकते थे। सबकुछ मेरी जानकारी में होते हुए भी मेरी जानकारी में नहीं होता, कारण आप जानते ही हो मुझे देश से ज्यादा मेडम की चिन्ता रखनी पड़ती है।


प्यारे देशवासियों!
आज देश में देशप्रमीयों का आतंक छाया हुआ है..सोनिया जी.... सोनिया जी.. मैं क्या कह रहा था.... ऐं... सोनिया जी...... हाँ! हमें इस आतंकवाद से लड़ने की जरूरत है। ये लोग अफजल से भी ज्यादा खतरनाक आतंकवादी है इन्हें विदेशों से भी बड़ी संख्या में सहयोग मिल रहा है। हर तरफ से लोकतंत्र की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की साजिश रची जा रही है। आज देश को देश की जनता से ही खतरा पैदा हो गया है। हमें इसका जमकर सामना करना पड़ेगा। संभव हुआ तो हमें विदेशों से भी जिसमें अलकायदा जैसे देश भक्तों जैसे संगठन को भी साथ में करना होगा। कसाब व अफजल जैसे देश के वफादारों को माफी देकर उनको मंत्री बनाने की भी हमारी योजना है। इस पर हम जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेने का मन बना रहे हैं। ताकी अगले मंत्रीमंडल विस्तार के समय इनको देश का रक्षा व विदेश मंत्रणालय सौंपा जा सकेगा।


प्यारे देशवासियों!
हमें बाहरी आतंकवाद से कोई खतरा नहीं है...सोनिया जी.... सोनिया जी.. मैं क्या कह रहा था.... ऐं... सोनिया जी...... हाँ! इसलिए हमने संसद में यह प्रस्ताव लाने पर भी विचार कर रहे हैं कि देश के अन्दर जो लोग सरकार को अस्थिर करने की साजिश में दोषी पाया जायेगा उसे दो माह में मृत्यु दण्ड देने का प्रावधान कानून में होना चाहिये जिससे हम अन्ना हजारे जैसे खुंखार आतंकवादियों से मुकाबला कर सकेगें।


प्यारे देशवासियों!
देश में भूखमरी की समस्या अब समाप्त हो चुकी है...सोनिया जी.... सोनिया जी.. मैं क्या कह रहा था.... ऐं... सोनिया जी...... हाँ! हर तरफ बढ़ती मंहगाई ने यह प्रमाणित कर दिया है कि देश की जनता की आमदनी में काफी इजाफा हुआ है जिसके ही चलते लोगों की सामान खरीदने की शक्ति बढ़ी है यह हमारी सरकार की सात सालों की सबसे बड़ी सफलता है। हमने इन सात सालों में देश को लुटने के कई नये तरीके भी हमारे चुने हुए सांसदों को सीखायें है जिसके बल पर ही आज हमारे....सोनिया जी.... सोनिया जी.. मैं क्या कह रहा था.... ऐं... सोनिया जी...... हाँ! चार-चार मंत्री जेल में देश की शान बढ़ा रहंे हैं। इनसे हमें बहुत कुछ सीखना होगा ताकी आने वाली हमारी युवा पीढ़ी को भी हम स्कूलों में इनका पाठ पढ़ाया जा सकेगा। ये हमारे देश के लिए सबसे गर्व की बात है कि हम भी दुनिया के चारे बेईमानों की सूची में भारत का नाम जल्द ही सबसे ऊपर ले आयेगें।...सोनिया जी.... सोनिया जी.. मैं क्या कह रहा था.... ऐं... सोनिया जी...... हाँ!


प्यारे देशवासियों!
हमने किसानों की देखभाल के लिए भी कई याजनाऐं बनायी है जिसमें उनकी जमीनों को देश के कानून के अनुसार हड़पकर उनको उन जमीनों से बेदखल कर बहुमंजिलें इमारतें बनावा कर लाखों-करोड़ों का धन....सोनिया जी.... सोनिया जी.. मैं क्या कह रहा था.... ऐं... सोनिया जी...... हाँ! सेठों के खजानों में जमा कर रहें हैं ताकी भविष्य में हमें जजब चुनाव लड़ना होगा तो यह धन देश के काम आ सके। इससे जो क्षति किसान भाईयों को होगी उसकी भरपाई करने के लिए हम शीध्र ही एक नये कानून लाने पर भी विचार कर रहें हैं जिससे किसानों की उपजाऊ जमीनों को देश के विकास में लगाया जा सकेगा।


मेरे देशवसियों,
हूँ...सोनिया जी.... सोनिया जी.. मैं क्या कह रहा था.... ऐं... सोनिया जी...... हाँ! हमारी सरकार देश के बच्चों के विकास पर भी बहुत बड़ा काम करने जा रही है। जल्द की हम हमारे देश के एक युवा सासंद को प्रधानमंत्री पद सौंपने जा रहे हैं। ताकी आनेवाला समय में, देश का भविष्य हमारे युवाओं के हाथों संचालित हो सके। हमारी पार्टी के अधिकतर चापलूस दलालों की राय में यही बात उभरकर सामने आ रही है।कि इस चुनाव से हमार देश दोतरफा मुकाबला कर सकेगा। कुछ लोगों का यह भी माना है कि इससे देश के युवावर्ग को कुत्ते की तरह रोटी डालकर फुसलाया जा सकेगा। इनका नाम सुनते ही देश के सारे के सारे कुत्ते दुम हिलाते हुए हमारे साथ आ खड़े होगें।



प्यारे देशवासियों!
अन्त में आज आपसे बहुत जरूरी बात भी करना चाहता हूँ...सोनिया जी.... सोनिया जी.. मैं क्या कह रहा था.... ऐं... सोनिया जी...... हाँ! देश को हिन्दूओं से बहुत बड़ा खतरा होने वाला है जो हमारे देश के अल्पसंख्यक भाईयों के लिए खतरे की घंटी है। देश की धर्मनिरपेक्षता पर भी हमला होने वाला है। लोकतंत्र खतरे में दिखाई दे रहा है। संसद की मर्याद को भी ताख पर रखा जा रहा है। देश में संविधान को भी जलाया जा रहा है जो हमारे देश के गाण्तंत्र के लिए एक चुनौती बनती जा रही है। हमारी बेइमानी पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया जा रहा है। हमने चार मंत्रियों को जेल भेज दिया फिर भी हमपर विश्वास नहीं किया जा रहा है। इसके लिए आपको एकजूट होकर हमारी सरकार को समर्थन देते रहना चाहिये। बाबा रामदेव व अन्ना हजारे हिन्दू धर्म के सांप्रदायिक लोग हैं इसके लिए...सोनिया जी.... सोनिया जी.. मैं क्या कह रहा था.... ऐं... सोनिया जी...... हाँ! इसके लिए आपको सावधान होने की जरूरत है। हमने सभी जाँच ऐजेंसियों को इनके धन और काले कारनामों की जाँच के आदेश दे दिये हैं। हमने साफ कह दिया है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकेगा। ये लोग संसद पर हमला करने की साजिस रच रहें हैं हमारे मंत्रीमंडल को भी खुफिया विभाग से सूचना मिली है कि ये आतंकवादी देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकते हैं इसलिए हमने देश के सभी विभागों को इनकी जाँच में लगा दिया है। हमारी पार्टी सदैव से आपलोगों को साथ देती रही है। अतः इस भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन को कूचलने के लिए हमें आप सबकी मदद चाहिये।...सोनिया जी.... सोनिया जी.. मैं क्या कह रहा था.... ऐं... सोनिया जी...... हाँ!


जय सोनिया जी! की जय हिन्द!