रविवार, 20 जुलाई 2008

मैं दिखाऊंगी नई राह

मैं
दिखाऊंगी नई राह
दूँगी नई सोच जमाने को
मुझे दुनिया में आने तो दो
मैं
जीना चाहती हूँ
मुझे जीने तो दो
इस कवि का हृदय जानने के लिये शीर्षक " मैं दिखाऊंगी नई राह " पूरी कविता नीचे लिंक में दिया हुआ है। आप भी भाग लेवें इस बहस में।

Seema Sachdev, 7a,3rd cross,Ramanjanaya layout, Marathalli, Bangalore-37
आगे देखें - बहस : भ्रूण हत्या

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