गुरुवार, 11 अप्रैल 2019

भारत में महाभारत-1


शंभु चौधरी 11/04/2019: 
17वीं लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण में चुनाव आयोग के अनुसार छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण रहा 20 राज्यों के 91 सीटों पर पहले दौर का मतदान आज हुआ जिसमें कई जगह ईवीएम मेशीनों में खराबी पाये जाने की सूचना भी समय-समय पर आती रही बंगाल की दो सीटों के लिये सबसे अधिक मत  81 प्रतिशत पड़े जबकि बिहार में चार सीटों के लिये सबसे कम महज 50 प्रतिशत ही मतदान हुआ आज के चुनाव में 1.7 लाख पोलिंग स्टेशन पर हुआ मतदान हुआ जिसमें 1239 उम्मीदवारों के भाग्य ईवीएम में बंद हो गया  मतदान में महिलाओं भागीदारी अच्छी बताई गई। अब दूसरे चरण का मतदान 18 अप्रैल को होना है।

REVIEW PETITION (CRIMINAL) NO. 46 OF 2019
आज के मतदान से ठीक एक दिन पूर्व देश की उच्चतम न्यायालय ने राफेल के मामले में हिन्दू में छपे सभी दस्तावेजों को स्वीकार करते हुए साथ ही यह भी कह दिया कि पिछले दिनों बंद लिफाफे को भी खुली अदालत में सार्वजनिक कर दिया जायेगा इसका अर्थ साफ हो गया कि मोदी सरकार ने बंद लिफाफे के सहारे जो क्लिन चिट पाई थी वह फैसला इस नये निर्णय के साथ ही शून्य हो गया और सरकार को अब वे सभी कागजात उच्चतम न्यायालय के सामने रखना पड़ेगा जो वह संसद से लेकर अदालत से, छुपाने का प्रयास कर रही थी। इतनी निडर सरकार तो पहले कभी नहीं देखी जो अपने पापों का भंडाफोड़ हो जाने के वाबजूद भी निर्भिक होकर बेशर्म होकर सेना की बलिदानी पर वोट मांग रही है।

माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 19(1 )  के अधिन आता है जिसमें अभिव्यक्ति की आजादी और प्रेस का स्वतंत्रता का है। कोर्ट ने माना कि सरकरी पक्ष जिस संविधान के अनुच्छेद 19 (2) में उल्लेख कर रही है उसमें ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है कि सरकार के अपराधों की जांच करना भी राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में आयेगा सर्वोच्च अदालत ने AIR 1950 SC 124,  AIR 1950 SC 129  and  1985(1) SCC 641 का  जिक्र करते हुए माना कि देखें --[*1994 (2) SCC 434 Printers (Mysore) Limited  vs. Assistant Commercial Tax ]  अदालत ने अपने फैसले में स्वीकार किया कि भारतीय प्रेस का देश के लोकतंत्र को मजबूत करने में बहुत बड़ा योगदान रहा है।  कोर्ट ने (Indian Express Newspapers (Bombay) Private Ltd. And Others v. Union of India 1985 (1) SCC 641)का भी उदाहरण प्रस्तुत करते हुए प्रेस की अभिव्यक्ति को भारतीय लोकतंत्र की पूंजी माना है।  उच्चतम न्यायालय ने पुनर्विचार याचिका को स्वीकार करते हुए राफेल के सौदे में हुए भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के अंर्तगत सुनवाई को ऊचित मानते हुए सरकार के उस धमकी भरे आवेदन को सिरे से खारिज करते हुए कहा भ्रष्टाचार की जांच करना ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न नहीं है।  
आज जहां देश की तमाम प्रेस मीडिया जहां डर के साये में जी रही है कि पता नहीं कब उनके ऊपर  भी कहीं 5000 करोड़ का मनाहानि का मामला तो न कर दिया जायेगा, ऐसे में हिन्दू  अखबार उनके वरिष्ठ पत्रकार एन.राम ने प्रेस की आजादी को नई रोशनी प्रदान की है।  जयहिन्द !
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