कन्हैयालाला सेठिया
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
कन्हैयालाला सेठिया
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 15 नवंबर 2008
स्मृति शेष: कन्हैयालाल सेठिया की कालजयी रचनायें
›
कन्हैयालाल सेठिया ११ सितम्बर १९१९ : ११ नवम्बर 2008 आज हिमालय बोला जागो, जीवन के अभिमानी ! जागो, जीवन के अभिमानी ! लील रहा मधु-ऋतु को पतझर, म...
शुक्रवार, 14 नवंबर 2008
स्मृति शेष: जद बन बिलावड़ो ले भाग्यो....
›
श्री सेठिया जी के काव्यों पर हिन्दी जगत के विचारों की एक झलक: आपकी कविता तथा कला का मणि-कांचन संयोग मुझे बहुत पसन्द आया । ऐसे संयोजित रूप से...
2 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें