गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

‘‘मजदूर दिवस व अव्यवस्थित लॉकडाउन’’ - शंभु चौधरी

मेरी मान्यता के अनुसार ‘‘ कल-कारखानों से अभीप्राय उन उद्योगों से है, जिसमें समूह में मानव ऊर्जा का प्रयोग किया जाता हो, भले ही उसमें उत्पादन में सहयोगी हेतु विद्युतीय मशीनों व अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता हो इनमें यदि मानव ऊर्जा का प्रयोग न किया जाए तो ये सभी संसाधन महत्वहीन व नरकंकाल के बराकर हैं । - शंभु चौधरी ’’
Das Capital
मई दिवस को हर साल पहली मई को अंतर्राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में पूरी दुनिया में मनाया जाता है । इसकी शुरुआत 1 मई, 1890 को पेरिस, फ्रांस में 14 जुलाई 1889 को हुई इस दिन दुनिया भर में कुल 80 प्रतिशत मजदूर अपने कार्यस्थल को पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद कर देते हैं । आज दुनिया के सामने कोरोनावायरस के संकट ने इसके नये स्वरूप पर हमें कुछ नया लिखने को मजबूर कर दिया है। सन 1918 की स्पेनी फ्लू ने पूरे विश्व में लगातार दो साल तक तबाही मचा दी थी। यह जनवरी 1918 में पैदा हुई और दिसम्बर 1920 तक चली और इसने 50 करोड़ लोगों को संक्रमित किया जो उस समय की दुनिया की आबादी का एक चौथाई है । इससे मरने वालों की संख्या अनुमानतः 170 लाख से लेकर 4 करोड़ के बीच बतायी गई है।  [देखें विकिपीडिया] इस काल में दुनिया भर में स्वः निर्मित लॉकडाउन हो गया था । हर व्यक्ति स्वयं व खुद के परिवार को बचाने के लिए अपने-अपने घरों में कैद हो गए। बस हर व्यक्ति इसी बात की दुआ कर रहा था कि यह बीमारी उसके घर में प्रवेश ना करे । स्पेनी फ्लू की महामारी ने मजदूरों के जीवन को भी काफी हद तक प्रभावित कर दिया था।  नब्बे प्रतिशत मजदूरों का जीवन संकट में आ गया था । कल-कारखाने बंद हो चुके थे । आज की तरह कोई सूचना का साधन न होने से मनगढंत कथाओं का बोलबाला था। पादरी, मौलबी, पंडितों ने इस अवसर को अपने-अपने धर्म के प्रचार में जम कर लगाया। उनको और भयभीत करते रहे, अफवाहों को फैलाते रहे । जिसका जितना बस चला वह उस तरह से अफवाहों को फैलाने लगा। समाचार पत्र उन अफवाहों का प्रचार माध्यम बन चुके थे ।

आज हम 21वीं सदी में जी रहें हैं । हमारे पास संचार के तमाम सुख-सुविधा जैसे मोबाइल फोन, इंटरनेट संचार, टीवी संचार, सोशल मीडिया संचार, समाचार पत्र आदि उपलब्ध है । जबकि आज भी हम धार्मिक अफवाहों का शिकार हो रहें हैं।  वुहान से निकला कोरोनावायरस ने दुनिया भर में कोहराम मचा दिया है। हर कोई अपने-अपने देश के सरकारी आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य है । लगभग पूरी दुनिया लॉकडाउन की चपेट में आ चुकी है। अब तक 212 देशों में इस महामारी ने, न सिर्फ उस देश में अपना आतंक फैला दिया है । लाखों लोग इस महामारी से संक्रमित हो चुके हैं। अब तक इस बीमारी का कोई ठोस इलाज, सिर्फ इस महामारी से समाज को, लोगों को कैसे बचाया जा सके के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं खोजा जा सका है । दुनिया भर के वैज्ञानिक इस महामारी की रोकथाम के लिए रोज़ाना रिसर्च कर रहे हैं । विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस महामारी को ‘कोरोना आतंकवादी’ की संज्ञा भी दे डाली है । जिसके प्रभाव से प्रायः सभी देशों में आज मजदूर तेजी से बेकार होते जा रहें हैं जो हमें किसी खतरनाक मंदी के दौर की तरफ ले जाने का संकेत भी दे रहा है ।

दुनिया मेरी इस बात से सहमत हो या नहीं मैं आज इस बात को लिखने को बाध्य हो रहा हूँ कि मजदूर एक प्रकार की ऊर्जा है जो किसी अन्य ऊर्जा से उसकी शक्ति को कम आंकना हमारी भूल होगी। कार्ल मार्क्स ने इस ऊर्जा का संगठित करने व उसके हक के लिए जितना कुछ भी किया उसे भी नाकारा नहीं जा सकता । कार्ल मार्क्स की एक पुस्तक दास कैपिटल 1867 ई. इस पुस्तक में पूँजी एवं पूँजीवाद का विश्लेषण है एवं इसका मजदूरों पर प्रभाव व उनको इस व्यवस्था के शोषण से मुक्त करने के उपाय बताये गए हैं। इस पुस्तक के द्वारा एक सर्वथा नवीन विचारधारा प्रवाहित हुई जिसने संपूर्ण प्राचीन मान्यताओं को झकझोर कर हिला दिया । इस पुस्तक के प्रकाशित होने के कुछ ही वर्षों के बाद रूस में साम्यवादी क्रांति हुई । हांलाकि आज का युग पूँजीवादी व्यवस्था को सही ठहराता है । इसका तर्क यह दिया जाता है कि कम पूंजी से उद्योगों को चलाया जाना और आज की जरूरतों को पूरा करना संभव नहीं है, परन्तु साथ ही इस व्यवस्था के सर्मथक यह बताना भूल जाते हैं कि टाटा, बिड़ला, रिलायंस, ईमामी समूह जैसी संस्थान भारत में कम पूंजी से कल कारखाने की स्थापना की थी । कल कारखाना का सिर्फ एक ही मतलब नहीं होता, कि जिसमें लोहे के संचालित बीजली के उपकरण लगे हों।  मेरी मान्यता के अनुसार ‘‘ कल-कारखानों से अभीप्राय उन उद्योगों से है, जिसमें समूह में मानव ऊर्जा का प्रयोग किया जाता हो, भले ही उसमें उत्पादन में सहयोगी हेतु विद्युतीय मशीनों व अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता हो इनमें यदि मानव ऊर्जा का प्रयोग न किया जाए तो ये सभी संसाधन महत्वहीन व नरकंकाल के बराकर हैं । - शंभु चौधरी ’’

आज जब हम लॉकडाउन के इस युग में जिसे हम सभी देख-सुन रहें हैं । यदि सिर्फ इस एक क्षेत्र की ही बात करें तो मानव ऊर्जा के महत्व को हम इंकार नहीं कर सकते । पूंजीवाद व्यवस्था धरी की धरी रह गई । यूएसए, इटली, फ्रांस, स्पेन, यूके जैसी सर्वशक्तिशाली महाशक्तियाँ जो पूंजीवादी व्यवस्था की परिचायक है इस लॉकडाउन को लेकर सबसे अधिक चिंतित है । उनको लगने लगा है कि मजदूरों को और नहीं बैठाया जा सकता इससे तमाम व्यवस्था चरमारा जायेगी ।

भारत में भी मार्क्सवाद का एक लंबा युग चला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की स्थापना 1925 में हुई आगे चल कर इसका विभाजन 1964 में हो कर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की स्थापना हुई । भारत में हिन्दी भाषी क्षेत्रों में जहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की पकड़ बनी हुई है वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की पकड़ गैर हिन्दी भाषियों में अच्छी पकड़ थी । इन राजनैतिक पार्टियों ने एक तरफ मजदूरों का दोहन पूंजीवादी व्यवस्था के साथ मिलकर अपने राजनैतिक सत्ता लोभ के चलते जमकर किया । सिर्फ बंगाल में ही सत्ता में 35 सालों के इनके शासन काल में लाखों मजदूर बेकार हो गए, सैकडों परिवारों ने रोजगार चले जाने से आत्महत्या कर ली, लगभग 56 (छप्पन) हजार कल-कारखाने  को माकपा के शासन काल में नर कंगाल बना दिये गये । मानवीय ऊर्जा का दोहन राजनीतिक लाभ में लिया जाने लगा। परिणाम सामने है ।

यही भूल हम आज कर रहें हैं। अचानक से हुए इस लॉकडाउन को व्यवस्थित भी किया जा सकता था, आज एक तरफ भारत की सड़कों पर लाखों मजदूर भूखमरी की मार झेल रहें हैं तो दूसरी तरफ भारत में आर्थिक महामारी को दौर भी जल्द शुरू हो जाए तो कोई बड़ी घटना नहीं होगी। इसका सबसे बड़ा कारण होगा अव्यवस्थित लॉकडाउन जिसे इतिहास याद करेगा । जयहिन्द।

कोरोना आतंकवादी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस को किसी आतंकवादी हमले से भी अधिक खतरनाक बताते हुए कहा कि यह दुनिया में उथल-पुथल मचा सकता है और इसलिए सभी देशों को एकजुट होकर इसका मुकाबला करना चाहिए। 

'कोविड-19' पर नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस को बुधवार को संबोधित करते हुये डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. तेद्रोस गेब्रियेसस ने कहा “इस वायरस को हराने के लिए इतिहास के किसी भी क्षण से अधिक इस समय मानव जाति को एक साथ खड़े होने की जरूरत है। मैं पहले भी कह चुका हूं कि यह वायरस कहर बरपा सकता है। यह किसी आतंकवादी हमले से भी बढ़कर है। यह राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक उथल-पुथल मचाने में सक्षम है। चयन हमारे हाथ मैं है और हमें राष्ट्रीय स्तर पर एकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता को चुनना चाहिये।” - विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) 

प्रवासियों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष ट्रेन चलाएं - राजस्थान सरकार





प्रवासी बन्धुओं हेतु महत्वपूर्ण  सूचना 


  • जैसा कि आपको विदित है कि राजस्थान सरकार ने सर्वप्रथम पहल कर एक-दूसरे राज्यों में अटके राजस्थान के प्रवासी भाई-बहनों को उनके घर पहुचाने की अनुमति के प्रयास किए ।
  • इसके लिए दो दिन पहले प्रवासियों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी शुरू कर दिया गया था। दो दिनों में ही 6 लाख 36 हजार से ज्यादा इच्छुक प्रवासियों ने रजिस्ट्रेशन करवा लिए हैं। यह प्रक्रिया अभी भी जारी है।
  • भारत सरकार ने 29 अप्रैल, 2020 से राज्यों द्वारा आपसी सहमती से प्रोटोकाॅल बनाकर विभिन्न  शर्तों के साथए विभिन्न स्थानों पर अटके हुए प्रवासियों, तीर्थ यात्रियों, पर्यटकों, छाात्रों एवं अन्य के आवागमन की अनुमति दी है।
  • जिन राज्यों में आप रह रहे हैं, वहां की सरकारों से राजस्थान सरकार ने अनुरोध किया है कि निजी वाहनों व अन्य साधनों से आने के लिए आपको अनुमति प्रदान करें।
  • परन्तु इतनी ज्यादा संख्या में रजिस्टर्ड लोागें का दूरस्थ राज्यों से बिना स्पेशल ट्रेन चलाए राजस्थान आना बहुत कठिन है ।
  • अतः हमने 29, अप्रैल, 2020 को ही भारत सरकार से स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था के लिए विशेष अनुरोध किया है।
  • जिन राज्यों में आप रह रहें हैं, वहां की सरकारों से सहमति प्राप्त करने के लिए मुख्य सचिव स्तर पर समन्वय किया जा रहा है।
  • संकट की इस घड़ी में प्रवासी व उनके परिजन आपस में संपर्क व समन्वय बनाये रखें जिससे सभी का आत्मविस्वास बनये रखें।
  • राजस्थान सरकार आपके साथ है।
  • टोल फ्री नम्बर 1800 180 6127  (प्रवासियों के लिए )

मुख्यमंत्री ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र राजस्थान सरकार के प्रयासों के बाद केन्द्र द्वारा जारी आदेश का स्वागत प्रवासियों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष ट्रेन चलाएं 


मुख्यमंत्री ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र
राजस्थान सरकार के प्रयासों के बाद केन्द्र द्वारा जारी आदेश का स्वागत
प्रवासियों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष ट्रेन चलाएं ।

जयपुर, 29 अप्रैल। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने राजस्थान सरकार द्वारा लगातार की जा रही मांग के बाद केन्द्र सरकार द्वारा श्रमिकों एवं प्रवासियों को उनके गृह स्थान पहुंचाने के लिए जारी आदेश का स्वागत किया है। श्री गहलोत ने कहा कि बड़ी संख्या में राजस्थान के प्रवासी विभिन्न राज्यों में फंसे हुए थे। साथ ही अन्य राज्यों के लोग भी यहां अटके हुए थे। दोनों ही संकट की इस घड़ी में अपने परिवारजनों के पास पहुंचना चाहते थे। राज्य सरकार ने उनकी भावनाओं को समझा और इस दिशा में लगातार सकारात्मक प्रयास किए, जिससे उनकी घर लौटने की राह खुल सकी।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा श्रमिकों एवं प्रवासियों के अन्तराज्यीय आवागमन के संबंध में बुधवार को जारी किए गए आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि प्रवासियों को सकुशल उनके घर पहुंचाने के लिए राजस्थान सरकार ने एक व्यवस्थित एवं सुगम प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की है जिसमें बुधवार रात तक करीब 6 लाख 35 हजार श्रमिकों एवं प्रवासियों ने अपना पंजीयन कराया है। 
श्री गहलोत ने कहा कि आने वाले समय में और भी श्रमिक अपना पंजीयन करा सकते हैं। ऐसे में कामगारों की इतनी बड़ी संख्या तथा लंबी दूरी को देखते हुए विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाना  कामगारों के सुरक्षित घर लौटने का व्यावहारिक समाधान होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि इन लाखों प्रवासियों एवं श्रमिकों के सुरक्षित आवागमन के लिए भारत सरकार को बिना किसी देरी के विशेष ट्रेनों का संचालन प्रारंभ करना चाहिए। 
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने विभिन्न पत्रों एवं प्रधानमंत्री के साथ समय-समय पर हुई वीडियो कांफ्रेंस में प्रवासियों एवं श्रमिकों की इस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया था। साथ ही प्रवासी राजस्थानियों की सहायता एवं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को संबंधित राज्य सरकारों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी गई थी। श्री गहलोत ने पत्र में कहा कि काफी समय से घर से दूर रहने की पीड़ा झेल रहे इन श्रमिकों एवं प्रवासियों की इस समस्या को दूर करने के लिए हमें व्यावहारिक मार्ग अपनाना होगा।
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Covid-19 India Website


India Government
Ministry of Health and Family Welfare


Bihar Government
1. https://covid19.bihar.gov.in/
[ Covid-19 Data  available on  twitter]

2. https://twitter.com/BiharHealthDept
[Official Twitter Handle Of Bihar Health Department]

3. https://twitter.com/sanjayjavin
[ Principal secretary, Bihar health dept.]

Bengal Government
https://wb.gov.in/COVID-19.aspx
https://twitter.com/wbdhfw
[ Covid-19 Data available on Twitter]

Delhi Government
Delhi Government
Delhi Corona Relief
Works for Clinic with Minister, Delhi

Gujarat Government
https://gujcovid19.gujarat.gov.in/


Maharashtra Government
https://arogya.maharashtra.gov.in/1175/Novel--Corona-Virus


Madhya Pradesh Government
http://mphealthresponse.nhmmp.gov.in/covid/


Rajasthan Government
https://covidinfo.rajasthan.gov.in/

Odisha Government
https://health.odisha.gov.in/covid19-dashboard.html

https://health.odisha.gov.in/


 Uttar Pradesh Government
http://dgmhup.gov.in/en/default

https://twitter.com/MhfwGoUP
[प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, श्री अमित मोहन प्रसाद जी]


 Punjab Government

COVID-19: Punjab Govt
http://pbhealth.gov.in/
Punjab : Media Bulletin COVID -19

to be continue..

मंगलवार, 28 अप्रैल 2020

गृहमंत्री जी का दर्द झलका


‘‘मैं कोरोना संक्रमण से लड़ रहे सीआरपीएफ के बहादुर सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इकराम हुसैन के निधन की सूचना से अत्यंत दुःखी हूँ । वह अंत समय तक कोरोना महामारी से पूरी वीरता से लड़े । देश की सेवा व आंतरिक सुरक्षा के लिए उनका योगदान हम सभी देशवासियों को प्रेरित करता है ।’’ - सौन-पुरुष गृहमंत्री जी श्री मान अमित शाह 
कोलकाता : 29/04/2020, अमेरिका के एक अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अपनी सालाना वार्षिक रिपोर्ट [2020] में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों के ऊपर बढ़ते हमले के तहत के लिए सीधे-सीधे वर्तमान भाजपा की सरकार को कठघरें में खड़ा कर दिया है । रिपोर्ट में कहा गया है कि

  “The national government allowed violence against minorities and their houses of worship to continue with impunity, and also engaged in and tolerated hate speech and incitement to violence.” 

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के पश्चात सत्ताधारी सरकार, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की अनुमति और नफरत भरे भाषण और हिंसा के लिए हिन्दुओं को उकसाने जैसे कृत्य में सम्मिलित है । रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने दोबारा सत्ता में आते ही नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) लागू कर दिया एवं इस संशोधन में (CAA) - अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से गैर-मुस्लिम प्रवासियों के लिए नागरिकता भारत में नागरिकता का प्रवाधान कर दिया । कई भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानों को ‘‘ जय श्री राम ’’ बोलने के लिए बाध्य किया जा रहा है नहीं बोलने पर उनकी हत्या कर दी जाती है । 

 “ BJP-ruled states, Lynch mobs often took on overtly Hindu nationalist tones. In June, in Jharkand, a mob attacked a Muslim, Tabrez Ansari, forcing him to chant “Jai Shri Ram (Hail Lord Ram)” as they beat him to death.” 

2019 में सत्ता में आने के बाद से लगातार सरकार मुसलमानों को तारगेट कर रही है । इस रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर जिसे मुस्लिम बाहुल राज्य का दर्जा देते हुए लिखा है कि सरकार ने इसके विशेष प्रावधान को हटाकर उनके धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रहार किया है।

“ In August, the government also revoked the autonomy of Muslim-majority state Jammu and Kashmir and imposed restrictions that negatively impacted religious freedom.” 

साथ ही भाजपा शासित राज्यों में गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों पर मोब लिंचिंग की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है ।

इस रिपोर्ट में बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, अल्पसंख्यकों पर लगातार हमला आदि विषय को भी उठाया गया है । इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि देश में हो रही मोब लिंचिंग की कई घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया व साथ ही भारत के गृहमंत्री अमित  शाह ने उल्टे कहा कि वर्तमान कानून में कोई संशोधन की जरूरत नहीं है, साथ ही उसने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से मोब लिंचिंग के सारे डाटा भी हटवा दिये।

  “ In 2018, the Supreme Court urged the central and state governments to combat lynchings with stricter laws. When, by July 2019, the central government and 10 states had failed to take appropriate action, the Supreme Court again directed them to do so. Rather than comply, Home Minister Shah called existing laws sufficient and denied lynchings had increased, while the Home  Ministry instructed the National Crime Records Bureau to omit lynchings from the 2019 crime data report.” 

इस रिपोर्ट में दिल्ली में पिछले फरवरी माह में जब अमेरिका के राष्ट्रपति भारत की यात्रा में थे ठीक उसी समय दिल्ली में लगातार तीन दिनों तक दिल्ली के मुस्लिम इलाकों में मुसलमानों के घरों को जलाया गया और उनको मारा गया जो दिल्ली पुलिस के रिपोर्ट के अनुसार वह गृह मंत्रणालय के अधीन कार्य कर रही थी । भले ही इस रिपोर्ट को भारत सरकार ने सिरे से इंकार कर दिया हो पर सच तो यही है कि भारत के गृहमंत्री श्री अमित शाह  इस सभी घटनाओं के ईर्द-गिर्द घूमते नजर आते हैं ।

आज देश कोरोनावायरस की महामारी से जूझ रहा है । दिनांक 29 अप्रैल तक भारत में अब तक कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या तीस हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है । इसमें अब तक मरने वालों की संख्या 937 बताई गई है । देशभर में लोगों की एक राय है कि ऐसे समय में जब हम दुनिया की इस महामारी से लड़ रहें हैं कम से कम इस समय तो हमें हिन्दू-मुस्लिम करने से परहेज करना चाहिये ।

भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा व आर.एस.एस प्रमुख मोहन भागवत ने भी सामने आकर कह दिया कि हमें किसी भी प्रकार का धार्मिक भेदभाव नहीं करना चाहिए । परन्तु पिछले एक माह के लाॅकडाउन के दौरान भारत के गृहमंत्री पूरी घटना से परोक्ष रूप से नदारद दिखे । शायद वे किसी धर्म विशेष के अभियान में व्यस्त रहे होंगे। कोई बात नहीं आज भारत के नये सौन-पुरुष गृहमंत्री जी श्री मान अमित शाह का दर्द झलक ही गया वे वे अपने ट्विटर हैंडल पर लिखते हैं ‘‘मैं कोरोना संक्रमण से लड़ रहे सीआरपीएफ के बहादुर सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इकराम हुसैन के निधन की सूचना से अत्यंत दुःखी हूँ । वह अंत समय तक कोरोना महामारी से पूरी वीरता से लड़े । देश की सेवा व आंतरिक सुरक्षा के लिए उनका योगदान हम सभी देशवासियों को प्रेरित करता है ।’’ अब देश के राष्ट्रवादी तथाकथित हिन्दुओं की रक्षा करने वाली सेना किस प्रकार भारत के गृहमंत्री को जबाब देती है यह भी हमें देखना है। - शंभु चौधरी, कोलकाता ।

‘‘कोरोना संकट व नमस्ते ट्रंप’’ शंभु चौधरी

डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले 24-25 फरवरी को भारत की यात्रा की थी । जिसमें लाखों लोगों को एक साथ बैठाया गया था। इसके पूर्व ही देश में तब तक कोरोना महामारी को लेकर सतर्कता जारी हो चुकी थी । विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना की महामारी से विश्व को सतर्क कर दिया था । भारत सरकार ने भी चीन से आने वालों को सतर्क कर दिया था । आज गुजरात में हर तरफ ‘‘नमस्ते ट्रंप’’ की चर्चा जोरों पर है । चीन के वुहान शहर को याद किया जा रहा है। सबको लगता है कि कहीं अहमदाबाद वुहान न बन जाए?
महाराष्ट्र में कोरोना: भारत में महाराष्ट्र को आर्थिक राजधानी के रूप में जाना-पहचाना जाता है । भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुंबई, महाराष्ट्र की राजधानी है । महाराष्ट्र की गिनती भारत के सबसे धनी एवं समृद्ध राज्यों में की जाती है।  आज महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमित लोगों का आंकड़ा 8590 पहुंच गया है। कल सोमवार दिनांक 27 अप्रैल को महाराष्ट्र में कोरोना के 522 नए मामले सामने आये। चार्ट देखें।  पूरे महाराष्ट्र को छह मंडलों में विभाजित किया गया है। जिसमें कोकण मंडल में सात जिले आते हैं - मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, रायगढ़, ठाणे, पालघर रत्नागिरी एवं सिंधुदूर्ग । नासिक मंडल में नासिक, धुले, नंदूरबार, जलगाव एवं अहमदनगर । पुणे मंडल में पुणे, सातारा, सांगली, सोलापूर एव कोंल्हापूर । औरंगाबाद मंडल में औरंगाबाद, जालना, परभणी, हिंगोली, बीड, नांदेड, उस्मानाबाद एवं लातूर । अमरावती मंडल में अमरावती, बुलढाणा, अकोला, वाशिम एवं यवतमाळ । नागपूर मंडल में नागपूर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपूर एवं गडचिरोली । यानी कि कुल छह मंडलों को 36 जिलों में बांटा गया है। जिसमें सबसे अधिक कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 5776 एवं मृत्यु 219  मुंबई शहर ‘मनपा’ से आते हैं जो कई सवाल खड़े कर देता है । जिस जगह तमाम शासन तंत्र, चिकित्सा के सभी सुख-सुविधाएं उपलब्ध है उसी जगह सबसे अधिक मामले शोचनीय है । वहीं आज अचानक से दिल्ली को पीछे छोड़ते हुए गुजरात का अहमदाबाद शहर रेड जोन में बदल चुका है। यानी कि इस शहर में पानी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगा है।

गुजरात में कोरोना: गुजरात पश्चिमी भारत में स्थित एक राज्य है। इसकी उत्तरी-पश्चिमी सीमा जो अन्तर्राष्ट्रीय सीमा भी है, पाकिस्तान से लगी है। राजस्थान और मध्य प्रदेश इसके क्रमशः उत्तर एवं उत्तर-पूर्व में स्थित राज्य हैं। महाराष्ट्र इसके दक्षिण में है। अरब सागर इसकी पश्चिमी-दक्षिणी सीमा बनाता है। इसकी दक्षिणी सीमा पर दादर एवं नगर-हवेली हैं। (*विकिपीडिया) पिछले बीस-बाईस सालों से यहाँ भारतीय जनता पार्टी की सरकार है । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी पंद्रह सालों तक यहां के मुख्यमंत्री बने रहे । उन्होंने भारत को गुजरात मॉडल की परिकल्पना दिखा कर केन्द्र की सत्ता में प्रधानमंत्री बने । आज जब इस कोरोना महामारी की बात आई तो वहाँ के अस्पतालों में लगी लंबी कतार और चिकित्सा के नाम पर जनता की हाहाकर दिल्ली के कानो तक भी नहीं पंहुच पा रही । शायद इस लिए भी कि गुजरात माॅडल की हवा निकल जाएगी। वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपानी हैं। 
इनके वेबसाइट पर एक नजर दौड़ाने पर पता चला कि "Major Initiative" कालम में ई-गोवर्नस, शिक्षा, कृषि, महिला व बाल विकास, ग्लोबल वार्निंग एवं इंफ्रास्टैक्चर की बात तो है पर स्वास्थ्य व चिकित्सा की कोई योजना इनके मानस में नहीं दिखी। जिसे गुजरात मॉडल का नमूना माना जा सकता है । खोजते-खोजते इनके जब https://gujcovid19.gujarat.gov.in/  उक्त वेबसाइट पर गया तो पता चला कि कोरोना संक्रमित लोगों के 3548 में से 2378 संक्रमित लोग एवं मृत्यु 109 (162 Total Death) में सिर्फ अहमदाबाद से ही है। सूरत में 556 संक्रमित लोगों  में  (19 Death) और बोडौदा में 240 संक्रमित लोगों  में  (13 Death) मामले सामने आये हैं ।

आज गुजरात में हर तरफ ‘‘नमस्ते ट्रंप’’ की चर्चा जोरों पर है ।
आपको याद होगा इसी  कोरोना महामारी के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले 24-25 फरवरी को भारत की यात्रा पर आये थे और उनके साथ आयी थी उनकी विशाल टीम जो कई दिनों तक अहमदाबाद की सुरक्षा की जांच कर रही थी।  इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान ट्रंप ने आगरा का ताज महल, नयी दिल्ली और अहमदाबाद  की यात्रा की थी।  अहमदाबाद के विशाल क्रिकेट स्टेडियम को राष्ट्रपति ट्रंप के स्वागत हेतु तैयार किया गया था । इसी अहमदबाद शहर में 700 करोड़ रुपये की लागत गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (जीसीए) के स्वामित्व वाले पुराने सरदार पटेल स्टेडियम को पूरी तरह तोड़कर नया बनाया गया ।  आज कोरोना की महामारी से पूरा अहमदाबाद कांप चुका है ।  सब कोई डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा को याद कर रहे हैं।  जिसमें लाखों लोगों को एक साथ बैठाया गया था। इसके पूर्व ही देश में तब तक महामारी को लेकर सतर्कता जारी हो चुकी थी । विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना की महामारी से विश्व को सतर्क कर दिया था । भारत सरकार ने भी चीन से आने वालों को सतर्क कर दिया था । आज गुजरात में हर तरफ ‘‘नमस्ते ट्रंप’’ की चर्चा जोरों पर है । चीन के वुहान शहर को याद किया जा रहा है। सबको लगता है कि कहीं अहमदाबाद वुहान न बन जाए?

मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

व्यंग्य: पत्नी देवो भव

....शंभु चौधरी, कोलकाता ।

पत्नी ने फिर एक ताना कसा - ‘‘ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप का नाम तो सुने होंगे ? उनकी सारी हेकड़ी इस कोरोना ने निकाल के उसके हाथ में थमा दी ‘‘लो गिनो लाशों को बैठे-बैठे’’ । तुमको तो मसल के बिना नमक-तेल लगाये कच्चा निगल जायेगा यह चीनी  कोरोना ।
21, April'2020, कोलकाता (भारत):
एक कहावत है- ”लॉकडाउन के लड्डू जो खाये पछताये, जो ना खाये वो भी पछताये“ रामप्रसाद जी लॉकडाउन में पिछले एक माह से घर में ही खुद की पत्नी के द्वारा क्वारंटाइन हो रखे हैं । अब तो पत्नी ने अखबार लेना बंद कर दिया, पता नहीं कोरोना किस रास्ते से घर में प्रवेश कर जाए, परन्तु जब राशन-पानी की बात आती तो सबसे पहले पत्नी फेरीवाले को बाहर आवाज देती सुनाई देती ।

एऐ भाई - ‘‘ परवल है?, नींबू है?
सब्जी वाला - हाँ! परवल चालीस रुपये किलो, नींबू दस के तीन । वह जबाब देता ।
कभी ऑनलाइन राशन नहीं मंगाया पर इस लॉकडाउन ने मुझे ऑनलाइन राशन भी खरीदना सीखा दिया था ।
दिनभर कभी मोबाइल में, कभी टीवी पर समाचार देखता रहता, सारा दिन बस कुछ लिखने में, कुछ पढ़ने में गुजर जाता ।
लॉकडाउन के चलते पिछले कई दिनों से काम पर मासी भी नहीं आ रही है सो घर के सारे काम में भी सहयोग करना पड़ता ही ।

झाडू-पौंछा, बर्तन सफाई, अब तो रोटी बेलना भी सीखा दिया था पत्नी ने ।
शादी के 35 साल गुजर गये, जितना रौब मैंने इन 35  सालों में नहीं दिखाया था इन एक माह के लॉकडाउन में पत्नी ने दिखा दिया । जो-जो काम कभी सोचा नहीं था सब सीखा दिया ।
आप मेरी इस विवशता का कृपया मजाक में ना लें यह हकीकत है जो बयाने दिले सुना रहा हूँ । अब कल की ही बात लें । मैं सोचा की नाश्ते में कुछ बना लिया जाय, सो पत्नी को पूछा - ‘‘कुछ लड्डू तल लें ?’

मेरा सवाल के शब्दों की विवषता देखिये वह हँसने लगी । बड़े साहित्यकार बनते हो ! इतना भी बोलना नहीं आता लड्डू तले नहीं, बनाये जाते हैं। उसने पलट के जबाब दिया ।
तब मुझे ख्याल आया कि आज तक तो लड्डू खाये ही खाये थे, अब घर में बैठा-बैठा कर भी क्या सकता था? मन ही मन आत्मग्लानि से भर चुका था । आज तक पत्रकारिता में घूल ही फांकी थी ? तभी मुझे पाठ्यक्रम की याद आ गई कि जिस क्षेत्र में पत्रकारिता करनी हो उस क्षेत्र की भाषा, तकनीकी शब्दों का अर्थ, उसके प्रयोग की जानकारी जरूरी है । ऐसा न हो कि बाँग्ला में एक वाक्य है - ‘जोल खाबे ?’ अब इसको यह लिख दिया जाए कि पानी खाने को पूछा । तो हिन्दी के पाठक हमें मारने दौड़ेंगे ठीक वही हालात मेरी आज मेरे ही घर में हो रही थी।
इस कोरोना ने मुझे इस कदर लाचार बना दिया था कि अपना डर भी नहीं दिखा पा रहा था ।

एक दिन धौंस दिखाते हुए बोल ही दिया कि - ‘‘ तुम आजकल कुछ ज्यादा ही बोल रही हो ।’’ मैं काम पर चला जाऊँगा ।
उसने भी पलट के जबाब दे दिया वह रास्ता खुला है । किसी ने रास्ता बंद नहीं किया । हाँ ! सुनो घर में मत आना जब तक लॉकडाउन है । दो माह का राशन घर में है उसके बाद की, बाद में सोचेगें ।
मेरी तो बोलती ही मानो बंद ।

सारा धौंस एक सेकेण्ड में कपूर की तरह उड़ गया । चुप-चाप पलंग पर लेट गया और हाथ में मोबाइल लेकर अपना ध्यान दूसरी तरफ करने लगा ।
अरे यह क्या भारत में तो कल कोरोना के बारह हजार मामले थे आज पंद्रह हजार हो गए ? भीतर ही भीतर मरने वालों की संख्या की तरफ ध्यान देता हूँ । रूह कंपकपाने लगी । गला सुखने लगा । पानी का ग्लास हाथ में लिया और एक घुंट पानी पी कर आँखे बंद कर ली । तभी-

पत्नी ने फिर एक ताना कसा - ‘‘ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप का नाम तो सुने होंगे ? उनकी सारी हेकड़ी इस कोरोना ने निकाल के उसके हाथ में थमा दी ‘‘लो गिनो लाशों को बैठे-बैठे’’ ।
फिर कुछ रूक कर- "तुमको तो मसल के बिना नमक-तेल लगाये कच्चा निगल जायेगा यह चीनी  कोरोना ।"
वैसे भी सुनी हूँ कि चीनी लोग खाने के बड़े शौकीन होते हैं । सांप, छछूंदर, चमगादड़, कुत्ते, बिलार, चूहा यहाँ तक की तेलचटा, केकड़ा सब हजम कर जाते हैं।  तुम तो इसे देखकर ही डर जाते हो । इस कोरोना से बचना है तो चुप से घर में पड़े रहो । मेरी बात मानो तो अच्छा ना मानो तो भी अच्छा । हमें तो लाश भी नहीं देगी सरकार देखने । बाहर जाना है तो फोटो फ्रेम बनवाते जाओ ।
अब तक मेरे दिमाग ठिकाने पर आ चुके थे । सारी इंद्रियाँ चुस्त-दुरुस्त हो गई थी। लॉकडाउन के लड्डू कितने महँगे है समझ में आ चुका था। भाई ! मेरी सलाह मान लो आज ‘‘पत्नी देवो भव’’  का मंत्र ही हमारी रक्षा का एक मात्र सूत्र है । बस । आगे कुछ भी मत सोचो ।

रविवार, 19 अप्रैल 2020

कोविड-19 या हिन्दू-मुस्लिम ?

....शंभु चौधरी, कोलकाता ।

        19 अप्रैल 2020, कोलकाता (भारत): भारत के प्रधानमंत्री ने आज बहुत अच्छी बात कही कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए सभी संप्रदाय के लोग एकजुट हो । ‘‘कोविड-19 जो किसी जाति, धर्म, रंग, पंथ, भाषा या सीमाओं को नहीं देखता। हमें एकता और भाईचारे को प्रधानता प्रदान करनी चाहिए।’’ साथ ही अंत में एक द्विअर्थी पंक्ति भी जोड़ दी।  "We are in this together : PM"  इसका अर्थ तो प्रधानमंत्री जी ही समझा सकते हैं कि उनके दिमाग में क्या चल रहा था इन शब्दों का चयन करते समय ? आम साधारण भाषा में तो इसका अर्थ यही लगाया जा सकता है। क्या सिर्फ कोरोना को लेकर ही हम एक हों बाकी विषय पर नहीं?

       
सब्जीवालों को भगवा झंडा लगा कर सब्जी बेचते
आजकल देश में एक साथ दो प्रकार की लड़ाई चल रही है पहली तो ‘कोविड-19’’ की लड़ाई तेजी से रफ्तार लेने लगी है। आजतक देश में कुल सोलह हजार से भी अधिक मामले सामने आ चुके हैं जैसे-जैसे जांच की रफ्तार तेज होगी इनकी संख्या एक लाख से भी ऊपर जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जिसमें अब तक 519 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। राहत कि बात इतनी ही है कि इनमें स्वस्थ हो कर घर वापस लौटने वालों की संख्या 2310 है। जांच की रफ्तार जितनी मंद गति से चलेगी उतनी ही तेज गति से कोरोना भारत के गांव व कस्बों को अपनी चपेट में ले लेगा। बिहार जैसे राज्य जहाँ बाढ़ के पानी के आने का हर साल इंतजार रहता है अभी तक नीतीश कुमार जी की सरकार तिनके से घोड़े को घास खिला रहे हैं वहीं बंगाल, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र की सरकारों के तले से जमीन सरकती नजर आ रही है। दरअसल इन राज्य के नेताओं को कोरोना का रोना सिर्फ दिखावा लगता है। ऐसे राज्यों को सेना के हवाले कर देना चाहिये जिन-जिन राज्यों के मुख्यमंत्री असक्षम हो या जिनके पकड़ में नहीं है।
        
        देश में इन दिनों कोरोना की महामारी के बीच हिन्दू-मुस्लिम की महामारी भी तेजी से फैल चुकी है। घर-घर में इस बात को लेकर तनाव पैदा कर दिया गया है अब सब्जीवालों को भगवा झंडा लगा कर सब्जी बेचते आसानी से देखा जा सकता है। यह प्रधानमंत्री जी के उक्त बयान की भी पुष्टि करता है कि जहर किस कदर समाज में फैलाया गया है। चित्र देखें।

        आये दिन कभी किसी गैर भाजपाई राजनेताओं के नाम से अफवाहें फैलाना तो कभी पुराने वीडियों को नये ठंग से सांप्रदायिक जमा पहनाना मानो भारत सरकार से इनको अफवाहों को फैलाने का लाइसेंस मिल चुका है।। धडल्ले से आप इनको फेसबुक या ट्विटर पर पोस्ट करते देखें जा सकते है। 

        शुक्रवार [17.04.2020] की ही एक घटना है गत शुक्रवार को महाराष्ट्र के पालघर गांव के कासा पुलिस थाने के अन्र्तगत एक घटना घटी । स्थानीय कलेक्टर कैलास शिंदे के अनुसार, सुशील गिरि महाराज (35), चिकेन महाराज (70) और ड्राइवर नीलेश तेलगड़े (30) अपने किसी व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए महाराष्ट्र से सूरत (गुजरात) जा रहे थे, लॉकडाउन की वजह से ये लोग गांव के रास्ते को चुन लिये थे ताकि रास्ते में कोई व्यवधान उत्पन्न ना हो जाए ।
इस घटना हिन्दू-मुस्लिम समझा जाय चुकि मरने वाले साधु-संत के वेश में थे ?
जब ये लोग पालघर गांव के एक ग्रामीण कस्बा गडचांचल से निकल रहे थे रात के लगभग 10 बजे उन्हें गांववालों ने पकड़ लिया । यह कस्बा आदिवासी बाहुल इलाका माना जाता है। मौके पर पुलिस भी पहुच चुकी थी ।  लॉकडाउन के मद्देनजर, पालघर जिले के ग्रामीण आदिवासी इलाकों में कई तरह की अफवाह फैल रही थी, जिसमें कुछ असामाजिक तत्व चोर, लुटेरे और अपहरणकर्ता वेश बदल कर गांव में आ सकते हैं बच्चों के चोरी की अफवाह उसमें से एक थी। आदीवासी ग्रामीणों ने इन तीनों पर संदेह के आधार पर धर दबोचा और पुलिस के सामने ही उन तीनों की सैकड़ों गांव वालों ने मिलकर उनकी हत्या कर दी। आरोपियों के खिलाफ कासा पुलिस स्टेशन में धारा  302, 120 (E) 427, 147, 148, 149/307, 353, 333, 323, 341 के तहत कुल तीन मामले दर्ज किए गए हैं। 110 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनमें से नौ 18 वर्ष से कम उम्र के हैं । यहां यह सोचने कि बात है कि सर्वप्रथम इस घटना हिन्दू-मुस्लिम समझा जाय चुकि मरने वाले साधु-संत के वेश में थे ? कि इसे साधारण मोबलांचिंग । दूसरा सबसे बड़ा सवाल यह भी उठता है कि घटनास्थल के वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वह साधु जिसकी उम्र लगभग 60-70 दिखती है बार-बार पुलिस को पकड़ कर खुद को बचाने की गुहार लगाता है। और घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी बार-बार हट रहा है उससे खुद को अलग कर रहा है । इससे दो बात तो साफ हो जाती है कि मारनेवाले यदि एक बार हम मान भी ले कि सबके सब मुसलमान हैं जैसा कि अंधभक्त दावा कर रहें हैं। तो क्या महाराष्ट्र की पुलिस जो उस समय घटनास्थल पर दिख रही है वह भी मुसलमान ही थी क्या? जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है भारत सरकार उन लोगों का धर्म भी उजागर करे ताकि इस तरह की अफवाहों को विराम लगाया जा सके। -जयहिन्द।